हिमंत विश्व शर्मा : असम में भाजपा के एजेंडे के एक विवादास्पद समर्थक
रंजन
- 04 May 2026, 09:27 PM
- Updated: 09:27 PM
गुवाहाटी, चार मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने जालुकबारी सीट पर 89,434 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब उनके कार्यकाल को एक ओर व्यापक समर्थन तो दूसरी ओर तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद शर्मा को असम और पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री बनने तक उनका सफर लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक कौशल का परिणाम माना जाता है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद 57 वर्षीय हिमंत शर्मा ने विकास कार्यों को गति देने, कल्याणकारी योजनाएं लागू करने और स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया है।
उनका कार्यकाल हालांकि कई विवादों से भी घिरा रहा है। विशेष रूप से बांग्लादेश मूल के बांग्ला भाषी मुसलमानों, जिन्हें राज्य में 'मियां' कहा जाता है, को लेकर शर्मा के बयानों और नीतियों ने व्यापक बहस को जन्म दिया है।
अतिक्रमण हटाने के अभियान, बाल विवाह के खिलाफ सख्ती, बहुविवाह पर कार्रवाई, मवेशी संरक्षण कानून का पालन, सरकारी मदरसों को बंद या परिवर्तित करने जैसे उनके कदमों को विपक्ष ने सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाने वाला बताया है।
चुनावी अभियान के दौरान उनके कुछ बयान भी विवादों में रहे। 'मियां समुदाय की रीढ़ तोड़ने' और उन्हें कम भुगतान करने जैसे कथित बयानों को लेकर राज्य ही नहीं, देशभर में आलोचना हुई।
विवादों के बावजूद शर्मा अपने रुख पर कायम रहे। इस बीच, उनकी पत्नी से जुड़े आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ विवाद भी सुर्खियों में रहा, जिसका जिक्र उच्चतम न्यायालय के एक आदेश में भी हुआ।
विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस ने उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं और उनकी पत्नी रिनीकी भुइयां शर्मा के कारोबारी लेन-देन पर सवाल उठाए हैं, हालांकि मुख्यमंत्री ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है।
कभी पूर्वोत्तर के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले शर्मा अब भाजपा के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हैं और विभिन्न राज्यों में पार्टी के एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी भाषा और शैली एक संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
वर्ष 1996 में अपने पहले चुनाव में हार के बाद शर्मा 2001 से लगातार जालुकबारी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कांग्रेस तथा भाजपा दोनों के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। वह 2001 से ही विभिन्न सरकारों में मंत्री रहे हैं और प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति के लिए जाने जाते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया और तरुण गोगोई के मार्गदर्शन में उन्होंने कांग्रेस में तेजी से उभरते हुए महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। लेकिन बाद में तरुण गोगोई के साथ मतभेद बढ़ने के कारण 2015 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए।
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल के साथ मिलकर 2016 में असम में पार्टी की पहली सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हुए उन्होंने 2021 में मुख्यमंत्री पद संभाला।
जोरहाट में जन्मे हिमंत विश्व शर्मा के पिता कैलाश नाथ शर्मा एक प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार थे, जबकि उनकी मां मृणालिनी देवी साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी थीं।
हिमंत ने 1992 में राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर और 1995 में कानून की डिग्री प्राप्त की। गुवाहाटी उच्च न्यायालय में पांच वर्षों तक वकालत करने के बाद उन्होंने 2006 में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री भी हासिल की।
राजनीतिक दृढ़ता, संगठनात्मक कौशल और विवादों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की क्षमता ने हिमंत विश्व शर्मा को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति में एक केंद्रीय चेहरा बना दिया है-हालांकि उनके नेतृत्व की दिशा और प्रभाव को लेकर बहस जारी है।
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