'इंडिया' गठबंधन के लिए सबक, किस्मत आज साथ है 'कल हो न हो'
अविनाश
- 04 May 2026, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
(सौरव रॉय बर्मन)
नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) किस्मत कभी बाजी पलट सकती है तो कभी दगा भी दे सकती है, विधानसभा चुनावों के नतीजे विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' को यह सबक दे गए।
अभी एक महीने भी नहीं हुआ जब विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया और सरकार को नाकामी झेलनी पड़ी। अब विपक्ष के प्रमुख दलों तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और माकपा को क्रमश: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल से सत्ता गंवानी पड़ी।
हालांकि, विधानसभा चुनावों में हार से लोकसभा में 'इंडिया' गठबंधन के संख्या बल में कोई बदलाव नहीं आएगा, लेकिन सोमवार के नतीजों से इस गठबंधन के आंतरिक स्वरूप पर गहरी छाप पड़ने का अनुमान है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत आसान नहीं थी, लेकिन अब उसकी विजय से राष्ट्रीय स्तर पर उसकी ताकत को बल मिलेगा। राज्य से लोकसभा के 42 सदस्य चुने जाते हैं तथा राज्यसभा चुनावों में यह प्रदेश भाजपा की ताकत को विस्तार देगा।
ये नतीजे तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के लिए बड़ा झटका है। इनके लोकसभा में क्रमश: 29 और 22 सदस्य हैं।
इन विधानसभा चुनावों के नतीजों से 'इंडिया' गठबंधन के नेतृत्व में बदलाव की मांग की संभावना भी कम हो गई है।
इससे पहले, जिन क्षेत्रीय दलों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, उन्हें खुद चुनावी हार का सामना करना पड़ा है, जिससे इन परिणामों के तत्काल बाद कांग्रेस के लिए गठबंधन के भीतर चुनौतियां कम हुई हैं।
विपक्षी गठबंधन के बीच के बदलते स्वरूप की एक झलक लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश होने से एक दिन पहले उस वक्त देखने को मिली जब इस पर रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक बुलाई थी। उस बैठक में राहुल गांधी भी शामिल थे।
तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सहित लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने उस बैठक में भाग लिया था। बैठक में टीएमसी ने संकेत दिया था कि चुनाव अभियान के कारण वह अपने 28 सदस्यीय संसदीय दल में से कई सांसदों को भेज नहीं पाएगी।
राहुल ने दृढ़ता से इसका विरोध किया और तर्क दिया कि उसके इस कदम से भाजपा को प्रभावी रूप से मदद मिलेगी। बाद में टीएमसी को अपना रुख बदलना पड़ा और अपने 21 सांसदों को लोकसभा में मतदान के लिए भेजना पड़ा।
अंततः एकजुट विपक्ष ने विधेयक को गिरा दिया। हालांकि, राहुल गांधी का यह रुख टीएमसी के एक वर्ग को पसंद नहीं आया। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने निजी तौर पर टिप्पणी की कि "ऐसे सहयोगियों को उपदेश देने से पहले उन्हें अपने ट्रैक रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए जो जानते हैं कि भाजपा को कैसे हराना है।''
ऐसे में टीएमसी की हार के विपक्ष के लिए अलग मायने हैं। यह विपक्षी नेतृत्व के सबसे मुखर दावेदारों में से एक को कमजोर करता है और 'इंडिया' गठबंधन के भीतर प्रधानता का दावा करने की उसकी क्षमता को कुंद करता है।
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