भोजशाला विवाद : मुस्लिम पक्ष को एएसआई की वीडियोग्राफी पर तीन दिन में आपत्तियां पेश करने का निर्देश
संतोष
- 04 May 2026, 08:35 PM
- Updated: 08:35 PM
इंदौर, चार मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने सोमवार को मुस्लिम समुदाय के एक पक्षकार को निर्देश दिया कि वह भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़ी वीडियोग्राफी पर तीन दिन के भीतर अपनी लिखित आपत्तियां पेश करे।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला व न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के समक्ष तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया और कहा कि उन्हें इस परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान की गई वीडियोग्राफी तक पहुंच नहीं मिल सकी है।
उधर, एएसआई के एक वकील ने कहा कि अदालत के निर्देशानुसार इस वीडियोग्राफी को गूगल ड्राइव पर उपलब्ध कराया गया था और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील को उसका एक्सेस भी दे दिया गया था।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद वारसी को वीडियोग्राफी देखने की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए और इसके लिए उच्च न्यायालय के आईटी अनुभाग को सोमवार को ही आवश्यक व्यवस्था करने के लिए कहा।
अदालत ने यह भी कहा कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के ई-मेल पते पर अतिरिक्त पहुंच उपलब्ध कराते हुए उनसे वीडियोग्राफी जल्द से जल्द साझा की जाए।
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी इस वीडियोग्राफी पर सात मई तक अपनी लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करे।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने एएसआई द्वारा धार के विवादित परिसर के संरक्षण के इतिहास के बारे में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह परिसर वर्ष 1904 से एक संरक्षित स्मारक है और एएसआई के नियामकीय नियंत्रण में रहा है।
उच्च न्यायालय में मुस्लिम पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 1935 में तत्कालीन धार रियासत के दरबार ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद घोषित किया था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जैन ने इस दावे की काट पेश करते हुए कहा कि यह ऐलान एएसआई संरक्षित स्मारकों से जुड़े प्रावधानों के कारण निष्प्रभावी हो चुका है और इसे कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है।
जैन की दलीलें पांच मई को भी जारी रहेंगी। उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।
भाषा हर्ष संतोष
संतोष
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