आरबीआई, इरडा जिंस वायदा एवं विकल्प खंड में निवेश की मंजूरी के पक्ष में नहींः सेबी चेयरमैन
रमण
- 04 May 2026, 03:40 PM
- Updated: 03:40 PM
मुंबई, चार मई (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के नियामक अपने विनियमित संस्थानों को जिंस डेरिवेटिव खंड में निवेश की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं।
पांडेय ने यहां 'आईएमसी कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस 2026' में एक संवाद सत्र के दौरान कहा, "संबंधित नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) बैंकों और बीमा कंपनियों को जिंस डेरिवेटिव में निवेश की अनुमति देने को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं हैं और इसके पीछे उनके पास ठोस कारण हैं।"
सेबी प्रमुख ने कहा कि भारत में पेंशन कोष विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने भी पेंशन कोष को जिंस डेरिवेटिव में निवेश की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार किया है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय का खुलासा नहीं किया है।
जिंस डेरिवेटिव खंड वित्तीय बाजार का वह हिस्सा है जहां सोना, चांदी, कच्चा तेल या कृषि उत्पादों जैसी वस्तुओं की भविष्य की कीमतों पर आधारित वायदा एवं विकल्प अनुबंधों में कारोबार होता है। सेबी इस खंड का नियमन करता है।
उन्होंने कहा कि सेबी जल्द ही बाजार मध्यस्थों के लिए एंथ्रोपिक माइथोस जैसे कृत्रिम मेधा (एआई) टूल की वजह से उभर रहे जोखिमों को लेकर परामर्श जारी करेगा।
पांडेय ने कहा, "हमने इस संबंध में सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की है और जल्द ही हम यह सलाह जारी करेंगे कि संभावित कमजोरियों के प्रति सतर्क रहने और सक्रिय रूप से जोखिम प्रबंधन करने की आवश्यकता है।"
पूंजी बाजार विनियामक के मुखिया ने कहा कि भारत को दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत है और बाजार-आधारित वित्त को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को बेहतर विकल्प देने के लिए बाजार के विकास और निवेशक संरक्षण को साथ-साथ आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) उद्योग के लिए समयबद्ध तरीके से कोष जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हाल में बदलाव किए गए हैं, जिसमें पर्याप्त निगरानी भी सुनिश्चित की गई है।
पांडेय के मुताबिक, बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाना जरूरी है, जिससे इक्विटी बाजार को पूरक समर्थन मिलेगा और बुनियादी ढांचे तथा उद्यमों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण को बल मिलेगा।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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