मणिपुर में जातीय हिंसा के तीन साल पूरे होने पर रैलियां निकाली गईं, बंद का आह्वान किया गया
रंजन
- 03 May 2026, 08:47 PM
- Updated: 08:47 PM
इंफाल/चुराचांदपुर, तीन मई (भाषा) मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा के तीन साल पूरे होने के मौके पर राज्य में विभिन्न स्थानों पर रैलियां निकाली गईं और बंद का आह्वान किया गया।
इस हिंसा में कम से कम 260 लोगों की मौत हो गई थी, हजारों निवासी विस्थापित हुए और राज्य में एक साल तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा था।
मेइती और कुकी समुदायों के बीच हिंसा 3 मई 2023 को उस समय भड़की थी, जब मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की उसकी मांग के विरोध में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था।
रविवार को इंफाल घाटी के कई जिलों में मेइती समूहों ने जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने और मणिपुर की प्रशासनिक और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की मांग को लेकर जुलूस निकाले। वहीं, कुकी-जो संगठनों ने कांगपोकपी जिले में बंद का आह्वान किया और चुराचंदपुर जिले में हिंसा पीड़ितों की याद में बैठकें कीं।
संयुक्त सुरक्षा समिति द्वारा बिष्णुपुर जिले के नामबोल में निकाली गई रैली में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
समिति के संयोजक टी लामजिंगबा ने कहा, ''यह रैली लोगों की पीड़ा को उजागर करने और संघर्ष पीड़ितों के लिए जवाबदेही एवं न्याय की मांग करने के लिए निकाली गई।''
इंफाल पूर्वी जिले के इबोयाइमा शुमांग लीला शांगलेन में, महिला संगठनों मीरा पैबिस और कोकोमी के प्रतिनिधियों ने 'मणिपुर संकट के तीन साल' विषय पर एक जनसभा में भाग लिया।
मणिपुर अखंडता समन्वय समिति (कोकोमी) की प्रवक्ता शांता नाहकपम ने कहा कि मणिपुर में हिंसा के तीन साल पूरे होने पर इसका आयोजन किया गया।
घाटी के पांचों जिलों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में, हिंसा में मारे गए 100 से अधिक मेइती लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) द्वारा सुबह 6 बजे से 12 घंटे के बंद के आह्वान के कारण व्यावसायिक गतिविधियां ठप रहीं।
कुकी के लिए मेइती समुदाय के साथ रहना असंभव होने का दावा करते हुए सीओटीयू उनके लिए अलग प्रशासन की मांग कर रहा है।
हिंसा में मारे गए 100 से अधिक कुकी-जो पीड़ितों को फाईजांग के शहीद कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि दी गई।
'इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम' (आईटीएलएफ) ने पीस ग्राउंड में एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जहां हिंसा पीड़ितों के लिए प्रार्थना की गई।
आईटीएलएफ के प्रवक्ता गिन्जा वुआलज़ोंग ने दावा किया कि हिंसा के दौरान लगभग 250 कुकी लोगों की हत्या कर दी गई, 40,000 अन्य विस्थापित हुए, 7,000 से अधिक घर जला दिए गए और लगभग 360 चर्च नष्ट कर दिए गए।
गिन्जा ने कहा, ''इन अत्याचारों को हम कभी नहीं भूल सकते।''
मणिपुर की लगभग 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय से है, जिनमें से ज्यादातर लोग इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि नगा और कुकी सहित आदिवासी समुदाय की आबादी 40 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं।
पिछले साल 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जब बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने महीनों तक चले जातीय हिंसा के बाद 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था।
राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद निलंबित कर दी गई थी।
भाजपा नेता वाई खेमचंद सिंह के चार फरवरी को मुख्यमंत्री बनने के साथ राज्य में नयी सरकार के गठन से कुछ घंटे पहले, राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया था।
भाषा सुभाष रंजन
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