पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद विदेश से पैसा भेजने पर कोई असर नहींः आरबीआई डिप्टी गवर्नर
रमण
- 01 May 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत में विदेश से भेजे जाने वाले 'मनी ऑर्डर' पर असर पड़ने की संभावना नहीं है और देश का भुगतान संतुलन 'संतोषजनक' स्थिति में बना रहेगा।
गुप्ता ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के भुगतान संतुलन में कुछ अंतर्निहित मजबूती है, जिसमें चालू खाते के तहत मजबूत धनप्रेषण यानी बाहर से आने वाला मनी ऑर्डर और सेवा निर्यात तथा पूंजी खाते में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "भारत को हर साल 135 अरब डॉलर से अधिक रकम विदेशों से भेजी जाती है और यह राशि लगातार बढ़ रही है। यहां तक कि कोविड-19 जैसे संकट के दौरान भी इसमें केवल मामूली गिरावट आई थी।"
उन्होंने कहा कि भारतीय धनप्रेषण में पश्चिम एशिया का हिस्सा घटकर लगभग 40 प्रतिशत रह गया है और प्रवासी भारतीयों का भौगोलिक वितरण अब अधिक विविध हो गया है। भारतीय प्रवासी अब सूचना प्रौद्योगिकी, होटल, स्वास्थ्य, शिक्षा और निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र में व्यवधान का समग्र प्रवाह पर सीमित प्रभाव पड़ता है।
आरबीआई की डिप्टी गवर्नर ने कहा कि मार्च के धनप्रेषण आंकड़े पहले की तुलना में बेहतर रहे हैं, जो संभवतः लौटे प्रवासियों द्वारा लाए गए संचित धन के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित है और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र पर इसका व्यापक असर नहीं है।
उन्होंने कहा, "यदि कुछ प्रवासी वापस लौटते भी हैं, तो पुनर्निर्माण गतिविधियों के शुरू होने पर उनके लिए रोजगार के अवसर फिर बढ़ सकते हैं। इन सभी कारणों से मैं प्रेषण को लेकर चिंतित नहीं हूं।"
मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण पर उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच महंगाई के अलग-अलग रुझानों को देखते हुए भविष्य में ढांचे की समीक्षा के दौरान अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति लक्ष्य ढांचे की अगली समीक्षा 2030-31 में होगी और इसमें मुख्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों में अधिक पारदर्शिता, उपभोक्ता बास्केट के नियमित अद्यतन तथा लक्ष्य सीमा में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण रूपरेखा की हाल की समीक्षा में दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत का लक्ष्य बरकरार रखा गया है।
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