अदालत ने सहारा शहर की जमीन के पट्टे से जुड़ी याचिका को किया नामंजूर
शोभना
- 30 Apr 2026, 12:05 AM
- Updated: 12:05 AM
लखनऊ, 29 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखनऊ स्थित शहर की जमीन का पट्टा खत्म करने के नगर निगम के सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका को नामंजूर कर दिया है।
लखनऊ नगर निगम के सितंबर 2025 में सहारा शहर कॉम्प्लेक्स की जमीन का पट्टा रद्द करते हुए भूमि खाली करने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मनजीव शुक्ला की पीठ ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि सहारा शहर से जुड़ा एक मामला पहले से ही उच्चतम न्यायालय में चल रहा है जहां सहारा ने एक अर्जी दी है और लखनऊ नगर निगम ने भी उस पर आपत्ति दर्ज कराई है।
पीठ ने गत 22 अप्रैल को आदेश जारी करते हुए कहा, "हमें लगता है कि इस मामले में हमारे हाथ बंधे हुए हैं।"
इसके साथ ही पीठ ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता ने लखनऊ नगर निगम के सितंबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 22 अक्टूबर 1994 को सहारा को दी गई जमीन का पट्टा रद्द कर दिया गया था। साथ ही 11 सितंबर, 2025 के उस अगले आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि इस जमीन के संबंध में दो सितंबर 2017 को उसके पक्ष में एक मध्यस्थता आदेश पारित किया गया था लेकिन लखनऊ नगर निगम ने उस आदेश की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से पट्टा रद्द कर दिया, जबकि कंपनी पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए ज़रूरी रकम जमा करने को तैयार थी। नगर निगम ने इस याचिका का विरोध किया।
याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि सहारा-सेबी विवाद में पारित आदेश के संबंध में सहारा समूह के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाएं लंबित हैं। इस मामले में, सहारा ने 14 सितंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी दाखिल की थी जिसमें उसने अदाणी समूह को अपनी कई संपत्तियां सौंपने की इजाजत मांगी थी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि अदाणी समूह के साथ इस सौदे से मिलने वाली रकम को सहारा-सेबी खाते में जमा करके उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक बाकी बची हुई शर्तों को पूरा किया जा सके।
पीठ ने यह भी पाया कि सहारा ने अदाणी समूह को सौंपने के लिए जिन संपत्तियों की सूची दी थी उनमें 'सहारा शहर' भी शामिल था।
पीठ ने पाया कि सहारा की याचिका पर इस समय उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है और कई तारीखों पर अंतरिम आदेश भी जारी किए जा चुके हैं इसलिए इस मौजूदा अर्जी पर अलग से विचार करने का कोई औचित्य नहीं है।
भाषा सं सलीम शोभना
शोभना
3004 0005 लखनऊ