केजरीवाल के बाद सिसोदिया ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के समक्ष पेश होने से इनकार किया
मनीषा
- 28 Apr 2026, 04:52 PM
- Updated: 04:52 PM
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा को मंगलवार को पत्र लिखकर कहा कि वह आबकारी मामले में उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।
इससे एक दिन पहले, पार्टी प्रमुख एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि आबकारी मामले में वह न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के माध्यम से उनके समक्ष पेश होंगे।
न्यायमूर्ति शर्मा को लिखे एक पत्र में सिसोदिया ने कहा, "मेरी ओर से कोई वकील भी पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता के हाथों में है।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है, सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।"
केजरीवाल द्वारा इसी चिंता को लेकर लिखे गए पत्र का जिक्र करते हुए सिसोदिया ने कहा कि "गंभीर चिंताओं" को उठाया गया है।
सिसोदिया ने कहा, "मैं उनके द्वारा अपनाए गए रुख से सम्मानपूर्वक सहमत हूं, जो महात्मा गांधी की सत्याग्रह संबंधी शिक्षाओं पर आधारित है।"
केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की थी लेकिन उन्होंने केजरीवाल की याचिका 20 अप्रैल को खारिज कर दी थी जिसके बाद 'आप' नेता ने सोमवार को उन्हें पत्र लिखा था।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि वह केजरीवाल द्वारा पहले ही विस्तार से कही गई हर बात को दोहराना नहीं चाहते, लेकिन वह यह दर्ज करना चाहते हैं कि वहां उठाए गए "चिंताजनक मुद्दे" उनके मन में भी हैं।
पत्र में कहा गया है, "पहला मुद्दा अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद में आपकी बार-बार सार्वजनिक उपस्थिति से उत्पन्न हुआ है, जो वकीलों का एक संगठन है और सार्वजनिक रूप से आरएसएस से संबंधित माना जाता है।"
सिसोदिया ने आगे कहा, "दूसरा मुद्दा केंद्र सरकार के कई पैनलों में आपके बच्चों की पेशेवर भागीदारी से उत्पन्न हुआ है और इसके परिणामस्वरूप उन कानून अधिकारियों से उनकी निकटता दिखाई देती है जो अब दूसरी तरफ मेरे खिलाफ पेश हो रहे हैं।"
उन्होंने लिखा, "इस मामले के संदर्भ में, ऐसे उदाहरण एक अधिक चिंताजनक प्रश्न को जन्म देते हैं: इस मामले में स्पष्टवादिता और आत्म-नियमन के न्यूनतम कर्तव्य क्या थे? क्या कम से कम, अभिभावक-न्यायाधीश का यह कर्तव्य नहीं था कि वह इन परिस्थितियों को शुरुआत में ही पक्षों के सामने प्रकट करें?"
सिसोदिया ने पत्र में कहा, "यही वह मुश्किल है जिसका सामना मैं आज कर रहा हूं। केजरीवाल की तरह मेरी चिंता भी अदालत के प्रति शत्रुता से उत्पन्न नहीं हुई है। यह एक गहरी बेचैनी से उत्पन्न हुई है कि अगर मैं इन परिस्थितियों के बावजूद इसमें भाग लेता रहा, तो मैं अपने देशवासियों के सामने यह दिखावा करते हुए कि सभी संदेह दूर हो गए हैं, अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध भी कार्य करूंगा।"
उन्होंने कहा, "इसलिए मेरे सामने सवाल सीधा सा है - क्या मैं निष्पक्ष न्याय की छवि को लेकर गंभीर आशंका रखते हुए ईमानदारी से इन कार्यवाही में भाग लेना जारी रख सकता हूं? बहुत विचार-विमर्श के बाद, मेरा जवाब केजरीवाल के जवाब जैसा ही है। मैं ऐसा नहीं कर सकता।"
सिसोदिया ने कहा कि इन कारणों को ध्यान में रखते हुए वह स्वयं या अपने वकील के माध्यम से न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे।
भाषा प्रशांत मनीषा
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