छत्तीसगढ़ के ईरपानार गांव में दशकों बाद बिजली आपूर्ति बहाल हुई
खारी
- 26 Apr 2026, 12:30 PM
- Updated: 12:30 PM
रायपुर, 26 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में कभी माओवादी गतिविधियों के गढ़ रहे एक दूरदराज के गांव में दशकों बाद बिजली की आपूर्ति हुई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
ईरपानार गांव के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जब शुक्रवार को घरों में बल्ब जले, तो निवासियों ने न सिर्फ पहली बार उनकी रोशनी देखी, बल्कि विकास की आहट को भी महसूस किया।
कई साल से लालटेन और लकड़ी पर निर्भर रहे गांववासियों ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए प्रशासन और बिजली विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
गांववासियों ने कहा कि बिजली आने से बच्चों को रात में पढ़ाई करने में मदद मिलेगी और मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि पंखे, लाइट और छोटे उपकरणों की उपलब्धता से दैनिक जीवन तो आसान होगा ही, इसके साथ भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार और छोटे व्यवसायों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, नारायणपुर जिले के घने जंगलों और पहाड़ी इलाके के बीच बसे इस गांव में करीब 56.11 लाख रुपये की लागत से कराए गए विद्युतीकरण से लगभग 10 परिवारों को लाभ मिलेगा।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि नारायणपुर समेत सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में माओवादी प्रभाव कम होने के बाद महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दूरदराज गांवों में बिजली पहुंचने से डर और अलगाव की भावना कम हुई है, जीवन स्तर में सुधार आया है और विकास की रफ्तार तेज हुई है, जो इस क्षेत्र के लिए अधिक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का संकेत देता है।
अधिकारी ने कहा कि दशकों बाद अंधेरे से बाहर निकलते हुए ईरपानार गांव में पहली बार राज्य सरकार की 'नियाद नेल्ला नार' (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत बिजली आपूर्ति हुई है।
उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र के दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।
अधिकारी ने बताया कि पास के हांडावाड़ा गांव में भी हाल के महीनों में बिजली आपूर्ति हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दूरदराज के क्षेत्रों को बिजली, सड़क, पीने का पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं से जोड़ने के लिए एक व्यापक पहल शुरू हो चुकी है।
नारायणपुर की जिलाधिकारी नम्रता जैन ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना एक सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था।
उन्होंने कहा कि यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर है, लेकिन वहां पहुंचने के लिए खड़ी चढ़ाइयों, घने जंगलों और मुश्किल रास्तों से पैदल गुजरना पड़ता है।
जैन ने कहा कि मानसून के दौरान और ज्यादा मुश्किल पेश आती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने प्राथमिकता के आधार पर इस कार्य को किया, कई जगहों पर मशीनी उपकरणों का उपयोग नहीं हो सका, इसलिए स्थानीय व्यक्तियों के सहयोग और मजदूरों की मदद से इसे अंजाम दिया गया।
जैन ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारियों ने समयबद्ध तरीके से विद्युत लाइनों का विस्तार, खंभों की स्थापना और घरेलू कनेक्शनों का कार्य पूरा किया।
भाषा जोहेब खारी
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