आप के सात सांसदों ने पार्टी छोड़ी, स्थापना के 14 साल बाद सबसे बड़ा झटका
नरेश
- 24 Apr 2026, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) भारत में राजनीति की नीति और नीयत में क्रांतिकारी बदलावों के दावे के साथ करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी (आप) के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया है क्योंकि शुक्रवार को उसके सात राज्यसभा सदस्यों ने उसकी चिर प्रतिद्वंदी पार्टी भाजपा का दामन थाम लिया।
राष्ट्रीय राजधानी में नवंबर 2012 की सर्दियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों के गुस्से से जन्मी यह पार्टी तेजी से एक ऐसी राजनीतिक ताकत में तब्दील हो गई जिसने दिल्ली में लगातार तीन बार सरकार बनाई -- पहली बार 2013 में, फिर 2015 और 2020 में। बाद में, पंजाब की सत्ता पर भी काबिज हुई।
पार्टी के शुरुआती वर्षों में इसका साथ देने वाले लोगों में कार्यकर्ता, पेशेवर और राजनीति में आए नये लोग शामिल थे। उन्होंने इसे बिल्कुल शुरुआत से खड़ा करने में मदद की। हालांकि, समय के साथ, नेतृत्व शैली और पार्टी की दिशा को लेकर मतभेदों का हवाला देते हुए, इनमें से कई शुरुआती साथी अलग हो गए।
शुक्रवार को आप को एक और बड़ा झटका लगा, जब इसके ज्यादातर राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
आप के करीब दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों के इस दल-बदल ने पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी सामूहिक नेतृत्व और विकेंद्रीकृत स्वरूप पर गर्व करने वाली पार्टी के लिए यह एक चुनौती बन गई है।
दल-बदल करने वाले समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे हाई-प्रोफाइल चेहरों ने किया। हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी पार्टी छोड़ने वाले अन्य चार सांसद हैं।
आम आदमी पार्टी के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी 2027 में गुजरात, गोवा और पंजाब में चुनावी मुकाबले के लिए कमर कस रही है।
आप नेताओं ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी का जमीनी स्तर से जुड़ाव और शासन का सिद्धांत, नेताओं के साथ छोड़ जाने के बावजूद बरकरार है।
वर्ष 2025 में भाजपा के हाथों दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद, आम आदमी पार्टी के पास वर्तमान में दिल्ली विधानसभा में 22 सदस्य हैं। पंजाब में, जहां, वह वर्तमान में सत्ता में है, आप के 92 विधायक हैं।
वर्ष 2022 में, आम आदमी पार्टी ने पांच विधायकों के साथ गुजरात विधानसभा में अपना खाता खोला था।
जम्मू कश्मीर में आप का पहला विधायक 2024 में चुना गया।
संसद में अब पार्टी के छह सदस्य रह गए हैं, जिनमें से तीन लोकसभा में और तीन राज्यसभा में हैं।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश
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