न्यायालय ने बंगाल में चुनाव ड्यूटी पर तैनात लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार किया
सुरेश
- 24 Apr 2026, 03:56 PM
- Updated: 03:56 PM
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में चुनावी ड्यूटी पर तैनात 65 व्यक्तियों समेत कई लोगों द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई थी।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या बाहर किए जाने के खिलाफ अपीलों पर फैसला करने के लिए गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों का रुख करें।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा, ''आपको ये दलीलें (अपीलीय) न्यायाधिकरण के समक्ष रखनी होंगी।''
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इन याचिकाओं में अंतर यह है कि 65 याचिकाकर्ता राज्य में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं।
उन्होंने कहा, ''चुनाव ड्यूटी के लिए जारी आदेश में ईपीआईसी (मतदाता फोटो पहचान पत्र) नंबर दर्ज था, जिसे बाद में हटा दिया गया। अब चुनाव ड्यूटी पर तैनात लोग वोट नहीं डाल सकते। प्रथम दृष्टया यह मनमाना है।"
वकील ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटाना ''मनमाना'' है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं को कोई ''कारण बताओ नोटिस'' जारी नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर कर चुके हैं।
इसपर पीठ ने कहा, ''उचित आदेश अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित किए जाएंगे।''
पीठ ने यह भी कहा, ''हम मतदाता सूची में बने रहने के अधिक महत्वपूर्ण अधिकार पर विचार करेंगे।''
शीर्ष अदालत दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पहली याचिका 71 लोगों, जबकि दूसरी याचिका छह लोगों की ओर से दायर की गयी है।
याचिकाओं में निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि जिन याचिकाकर्ताओं की अपीलें लंबित हैं, उन्हें बंगाल चुनावों में मताधिकार के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए।
बंगाल में मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल को संपन्न हुआ, जबकि दूसरा एवं अंतिम चरण 29 अप्रैल को होना है। नतीजे चार मई को घोषित किए जाएंगे।
इससे पहले बंगाल में एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि जिन मतदाताओं की अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं, उनके नाम शामिल करते हुए पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए।
न्यायालय ने कहा था कि केवल अपील लंबित रहने मात्र से सूची से बाहर किए गए लोगों को मतदान का अधिकार नहीं मिल जाएगा।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या बाहर किए जाने के खिलाफ अपीलों के निपटारे के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरण गठित किए हैं।
भाषा गोला सुरेश
सुरेश
2404 1556 दिल्ली