प. बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण के लिए प्रचार समाप्त, 23 अप्रैल को मतदान
दिलीप
- 21 Apr 2026, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
कोलकाता, 21 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण के लिए प्रचार मंगलवार को समाप्त हो गया, जिसमें खान-पान की आदतों, सीमा पार से घुसपैठ, समान नागरिक संहिता और संशोधित मतदाता सूची जैसे मुद्दे छाए रहे।
दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने 23 अप्रैल को उत्तरी बंगाल के 152 निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य के दक्षिणी हिस्से के कई जिलों में मतदान से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए कई वादे किए।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान कर सकेंगे। इन मतदाताओं में लगभग 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।
भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक हिंसा, अराजकता और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार देखने को मिला है। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दिया, जिसके कारण जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ।
मंगलवार को अपनी अंतिम रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि चार मई को राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा, "राज्य की बागडोर उनके हाथों में रहने का समय अब समाप्त हो गया है।"
लोगों से बिना किसी डर के मतदान करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, "कोई भी हमारे मतदाताओं को धमका नहीं सकता। निर्वाचन आयोग ने पर्याप्त संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात किया है, जो राज्य के कोने-कोने में फैले हुए हैं।"
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,450 कंपनियों को तैनात किया है, जिनमें लगभग 2.5 लाख कर्मी शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और पहले चरण के लिए 8,000 से अधिक मतदान केंद्रों को 'अत्यधिक संवेदनशील' के रूप में चिह्नित किया है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी का "झूठे वादे" करने का एक लंबा इतिहास रहा है, क्योंकि उसने "हर बैंक खाते में 15 लाख रुपये और हर साल दो करोड़ नौकरियां" देने का अपना वादा पूरा नहीं किया।
बनर्जी ने कहा, "जो लोग बुनियादी वादे पूरे नहीं कर सके, उन पर कल्याणकारी लाभ प्रदान करने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता।"
इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में आसानी से सत्ता में वापसी करेगी और दावा किया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार 2026 के बाद नहीं टिक पाएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने हाल ही में एक रैली में कहा था कि वह पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी 294 सीट पर भाजपा के उम्मीदवार हैं।
उन्होंने कहा, "ऐसा होने के लिए, आपको सबसे पहले प्रधानमंत्री का पद छोड़ना होगा।"
बनर्जी ने जोर देकर कहा, "इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा चुनाव नहीं जीतेगी। तृणमूल कांग्रेस फिर से सरकार बनाएगी। हम 2026 में ही भाजपा को दिल्ली से भी बाहर निकाल देंगे।"
आयोग ने मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, कूच बिहार, बीरभूम और बर्धमान जैसे कुछ जिलों को 'विशेष रूप से संवेदनशील' के तौर पर चिह्नित किया है और इन क्षेत्रों के सभी निर्वाचन क्षेत्रों को कड़ी निगरानी में रखा है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है, जिन्हें निगरानी टीम और 2,193 त्वरित प्रतिक्रिया टीम का सहयोग प्राप्त है, ताकि किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
इस चरण के प्रमुख उम्मीदवारों में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (भाजपा, नंदीग्राम), पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक (भाजपा, माथाभांगा), राज्य के मंत्री उदयन गुहा (तृणमूल, दिनहाटा), गौतम देब (तृणमूल, सिलीगुड़ी) और अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस, बहरामपुर) शामिल हैं।
पहले चरण में चुनाव लड़ रहे अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट से तृणमूल के प्रदीप सरकार के खिलाफ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष शामिल हैं।
भाषा
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