मप्र विधानसभा का एकदिवसीय सत्र 27 अप्रैल को
अमित
- 21 Apr 2026, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
भोपाल, 21 अप्रैल (भाषा) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के कुछ दिन बाद 27 अप्रैल को मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
इस विशेष सत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सत्र को लेकर मंगलवार को अधिसूचना जारी की गई।
एक अधिकारी ने बताया कि अधिसूचना के अनुसार, सदन में नारी शक्ति वंदन - महिलाओं का समग्र विकास और उनका सशक्तीकरण' पर चर्चा होगी।
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाए जाने पर सवाल उठाए और कहा कि 'नारी शक्ति' के नाम पर जब राजनीतिक अवसर दिखाई देता है, तत्काल विशेष सत्र बुला लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट, सुसंगत और मजबूत रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "जैसे ही नारी शक्ति के नाम पर राजनीतिक अवसर दिखाई देता है, तत्काल विशेष सत्र बुला लिया जाता है।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पहले की साफ कर दिया है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीट पर महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, पूरी कांग्रेस पार्टी इसके समर्थन में है।
सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश में कफ सीरप जैसी घटनाओं में मासूम बच्चों की मौत होती है, दूषित पानी से दर्जनों लोगों की जान चली जाती है, अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं हो पाती, ओबीसी वर्ग के अधिकारों के साथ अन्याय होता है और आदिवासी समुदाय अपने हकों के लिए लगातार संघर्ष करता है।
उन्होंने कहा, "इन गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार कभी विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता महसूस नहीं करती।"
लोकसभा में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।
सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को लोकसभा में विधेयक का समर्थन नहीं करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा था और घोषणा की थी कि इस मामले पर चर्चा के लिए राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
भाषा ब्रजेन्द्र
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