आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न के सभी फॉर्म अधिसूचित
अजय
- 31 Mar 2026, 09:16 PM
- Updated: 09:16 PM
नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) के सभी फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आयकर विभाग ने मंगलवार को आईटीआर-2, 3, 5, 6 और 7 के साथ अद्यतन रिटर्न दाखिल करने के लिए आईटीआर-यू फॉर्म को भी अधिसूचित किया।
इसके पहले आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म 30 मार्च को अधिसूचित किए गए थे। इन फॉर्म का इस्तेमाल छोटे और मध्यम करदाता करते हैं।
व्यक्तिगत करदाताओं और खातों का ऑडिट आवश्यक नहीं होने वाले करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।
एकेएम ग्लोबल के भागीदार-कर संदीप सहगल ने कहा कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर-1 (सहज) के दायरे को बढ़ाया गया है। अब इसमें करदाताओं को दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय की जानकारी देने की अनुमति दी गई है।
उन्होंने बताया कि पहले यह फॉर्म केवल एक घर से होने वाली आय तक सीमित था और दूसरे घर से आय होने पर करदाताओं को आईटीआर-2 या आईटीआर-3 भरना पड़ता था, लेकिन इस बदलाव से करदाताओं का अनुपालन बोझ कम होगा।
वहीं, डेलॉयट इंडिया के भागीदार सुमित सिंघानिया ने कहा कि आय की जानकारी देने के ढांचे और प्रपत्रों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये फॉर्म आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ही भरे जाएंगे, इसलिए इन्हें मौजूदा नियमों और जानकारी देने की अनिवार्य शर्तों के अनुरूप ही रखा गया है।
आईटीआर-1 (सहज) और आईटीआर-4 (सुगम) अपेक्षाकृत सरल फॉर्म हैं, जो बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए हैं।
सहज फॉर्म को ऐसे निवासी व्यक्ति भर सकते हैं जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय वेतन, एक मकान, अन्य स्रोत (ब्याज) एवं 5,000 रुपये तक की कृषि आय से होती है।
वहीं, सुगम फॉर्म ऐसे व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और फर्म (एलएलपी को छोड़कर) के लिए है, जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है।
आईटीआर-2 फॉर्म उन व्यक्तियों और एचयूएफ के लिए है जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से नहीं होती, लेकिन पूंजीगत लाभ से आय होती है। वहीं, आईटीआर-3 फॉर्म ऐसे व्यक्तियों और एचयूएफ के लिए है जिनकी आय स्वामित्व वाले व्यवसाय या पेशे से होती है।
आईटीआर-5 फॉर्म को फर्म, सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी) और सहकारी समितियां दाखिल करती हैं, जबकि आईटीआर-6 फॉर्म कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनियों के लिए है।
इसके अलावा, आईटीआर-7 फॉर्म ट्रस्ट और परमार्थ संस्थाओं के लिए निर्धारित है।
भाषा
सुमित अजय
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