महिलाओं के लिए योजनाएं "सामाजिक निवेश" हैं, जिनका उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है: कनिमोई
नरेश
- 30 Mar 2026, 03:20 PM
- Updated: 03:20 PM
चेन्नई, 30 मार्च (भाषा) द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की उपमहासचिव कनिमोई ने कल्याणकारी योजनाओं को मुफ्त की सौगात कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए सोमवार को कहा कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी पहल "सामाजिक निवेश" हैं, जिनका उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
विधानसभा चुनाव के लिए द्रमुक का घोषणापत्र जारी होने के एक दिन बाद यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमें समझना चाहिए कि यह सामाजिक निवेश है। सामाजिक न्याय के लिए निवेश है। संभव है कि जो लोग मानते हैं कि सामाजिक न्याय नहीं होना चाहिए, वे इसे समझे बिना इसकी आलोचना करें।"
"द्रविड़ मॉडल" शासन के आर्थिक पहलू को समझाते हुए कनिमोई ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम समेत वैश्विक अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वास्तविक आर्थिक प्रोत्साहन तभी मिलता है जब पैसा सीधे "लोगों के हाथों में" दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने 'मगलिर उरिमई थोगई' (महिला बेसिक इनकम) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1.3 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी बदलाव आया है, क्योंकि इससे लाभार्थियों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को दूसरों पर निर्भर हुए बिना अपने स्वास्थ्य या छोटे व्यवसायों में निवेश करने का अवसर मिला है।
'विदियाल पयनम' (महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा) योजना के प्रभाव पर उन्होंने बताया कि इससे अप्रत्यक्ष आय होगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अब एक महिला अपने खाली समय का उपयोग यात्रा करके अंशकालिक काम करने में कर सकती है और संभावित रूप से 5,000 रुपये महीना कमा सकती है, क्योंकि यात्रा खर्च की बाधा खत्म हो गई है।
द्रमुक नेता ने उन आलोचकों पर भी निशाना साधा जो वॉशिंग मशीन या माइक्रोवेव जैसे घरेलू उपकरणों को विलासिता मानते हैं।
ऐसे उपकरणों के लिए वाउचर देने के पार्टी के वादे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य महिलाओं के "कठिन परिश्रम" और "समय की कमी" को कम करना है।
कनिमोई ने बताया कि घोषणापत्र में वादा किया गया है कि 8,000 रुपये का वाउचर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए है, जिससे उनपर घरेलू काम का बोझ कम होगा।
उन्होंने कहा, "सिर्फ महिलाएं ही इस तकलीफ को समझती हैं।"
कनिमोई ने उदाहरण देते हुए कहा कि गैस चूल्हे पर खाना दोबारा गर्म करने में बर्तनों को बदलना और फिर अतिरिक्त बर्तन साफ करना पड़ता है, जबकि सीधे फ्रिज से बर्तन माइक्रोवेव में रखकर समय और श्रम दोनों बचाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि रसोई से इस तरह की राहत महिलाओं को अपना समय अन्य उत्पादक कार्यों में लगाने का अवसर देती है।
सरकार के प्रदर्शन के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 2021 के घोषणापत्र में किए गए 505 वादों में से 404 पूरे किए जा चुके हैं। शेष 101 में से कुछ केंद्र सरकार के सहयोग की कमी के कारण लंबित हैं, जबकि 64 को स्थानीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्ष में कई ऐसी योजनाएं भी लागू की गईं जो उस समय के घोषणापत्र में शामिल नहीं थीं, जैसे स्कूली छात्रों के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना।
उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव के लिए घोषणापत्र व्हाट्सऐप, ईमेल और सीधे बैठकों के माध्यम से प्राप्त हुए लगभग 80,000 सुझावों के विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है ताकि हर वादा "व्यवहारिक" और पूरा करने योग्य हो।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश
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