मर्चेंट नेवी के कैप्टन की होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मौत; परिजनों ने शव वापस लाने में मदद मांगी
दिलीप
- 20 Mar 2026, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
(राघवेंद्र प्रताप सिंह)
रांची, 20 मार्च (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट तेल ले जा रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर सवार मर्चेंट नेवी के कैप्टन राकेश रंजन की मौत हो गई। उनके परिवार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी तथा केंद्र और झारखंड सरकार से उनके शव को वापस लाने में मदद करने का आग्रह किया।
रांची निवासी रंजन (43) एक निजी कंपनी के स्वामित्व वाले पोत 'एएसपी अवाना- आरपीएसएल-एमयूएम-172' पर दो फरवरी को सवार हुए थे।
उनके परिवार के अनुसार, रंजन की मृत्यु 18 मार्च को कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई।
परिवार ने दावा किया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण क्षेत्र में आवागमन रुकने के बाद से जहाज 28 फरवरी से होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 14 समुद्री मील दूर फंसा हुआ था।
रंजन के बड़े भाई उमेश सिंह ने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध करता हूं कि वे मेरे भाई के शव को जल्द से जल्द वापस लाने में मदद करें। कंपनी को भी उनके वित्तीय बकाया और अन्य लाभों के भुगतान में कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए और सरकार को इस मामले की निगरानी करनी चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, मैं केंद्र सरकार, दुबई स्थित भारतीय दूतावास और कंपनी से आग्रह करता हूं कि वे मेरे भाई का शव जल्द से जल्द हमें सौंप दें।''
सिंह ने बताया कि शव को वापस लाने में सहायता के लिए मुख्यमंत्री सोरेन और रांची से सांसद संजय सेठ को पत्र भेजे गए हैं।
सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''मेरा छोटा भाई जहाज का कैप्टन था। 18 मार्च को कंपनी ने हमें सूचित किया कि बेहोश होने के बाद वह अपनी कुर्सी से गिर गया था और उसे चिकित्सा सहायता प्रदान करने के प्रयास किए गए। हालांकि, उसे विमान से भेजने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उसे नौका से दुबई के पोर्ट राशिद ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।'' उन्होंने कहा कि संभवतः हृदय गति रुकने से उसकी मृत्यु हुई है।
उन्होंने कहा कि परिवार पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करेगा, जिससे रंजन की मृत्यु का कारण पता चलेगा।
सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''शव को पुलिस की निगरानी में पोर्ट राशिद के शवगृह में रखा गया है।
सिंह ने बताया कि परिवार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के बिहार शरीफ का रहने वाला है, लेकिन रंजन पिछले लगभग दो दशकों से अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रांची में रह रहे थे।
उन्होंने बताया कि कंपनी के कुछ प्रतिनिधियों ने बृहस्पतिवार को परिवार से मुलाकात की और उन्हें सूचित किया कि शव सौंपने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन तीन दिन की ईद की छुट्टी के कारण इसमें देरी हो रही है।
भाषा सुरभि दिलीप
दिलीप
2003 1940 रांची