प्यार कांग्रेस से लेकिन शादी भाजपा से : खरगे का जद (एस) पर तंज
देवेंद्र
- 18 Mar 2026, 10:59 PM
- Updated: 10:59 PM
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को उस समय कुछ हल्के-फुल्के पल देखने को मिले जब कांग्रेस अध्यक्ष तथा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा कांग्रेस से 'प्यार' करते थे लेकिन 'शादी' भाजपा से कर ली।
बाद में जद (एस) नेता देवेगौड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ ''बेमेल शादी'' हुई थी और इस वजह से उन्हें ''तलाक'' देना पड़ा।
सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को विदाई देते हुए विपक्ष के नेता खरगे ने कहा कि वह देवेगौड़ा को पिछले 54 वर्षों से जानते हैं और उनके साथ मिलकर काम किया है।
उन्होंने कहा, ''हालांकि, मुझे नहीं पता कि क्या हुआ; उन्होंने प्यार और स्नेह हमारे साथ साझा किया लेकिन उन्होंने मोदी साहब (भाजपा) से शादी कर ली...।''
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उस समय सदन में उपस्थित थे, हालांकि देवेगौड़ा सदन में नहीं थे।
देवेगौड़ा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में पलटवार करते हुए कहा, ''प्रिय मित्र मल्लिकार्जुन खरगे ने आज संसद में कांग्रेस के प्रति मेरे 'प्रेम' और भाजपा के साथ 'विवाह' पर एक मजाकिया टिप्पणी की। जब उन्होंने टिप्पणी की, मैं सदन में उपस्थित नहीं था।''
उन्होंने कहा, ''मेरा जवाब यहां है, जो हल्के-फुल्के अंदाज में और तथ्यों पर आधारित है कि मुझे कांग्रेस से 'तलाक' क्यों लेना पड़ा।''
देवेगौड़ा ने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
उन्होंने कहा, ''जब खरगे बोल रहे थे, तब मैं सदन में उपस्थित नहीं था क्योंकि मुझे कल के उगाडी समारोह में शामिल होने के लिए बेंगलुरु जाना था। अगर मुझे अपने मित्र को विवाह की उसी भाषा में जवाब देना हो, तो मैं कहना चाहूंगा कि कांग्रेस के साथ मेरा 'जबरन विवाह' हुआ था, लेकिन मुझे उनसे 'तलाक' लेना पड़ा क्योंकि यह एक अपमानजनक रिश्ता था।''
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि खरगे को याद होगा कि 2018 में कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को भेजा था और कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी।
देवेगौड़ा ने कहा, ''मैंने इसे स्वीकार नहीं किया। मैंने सभी के सामने कहा था कि श्री खरगे को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। श्री सिद्धरमैया भी वहां मौजूद थे।''
उन्होंने कहा, ''... बाद में मैंने कांग्रेस गठबंधन नहीं छोड़ा। वे ही मुझसे अलग हो गए। उन्होंने मुझे 'अलग होने' और अधिक स्थिर गठबंधन तलाशने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा।''
भाषा अविनाश देवेंद्र
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