जयराम रमेश ने स्वेज सकंट के समय कृष्ण मेनन के कूटनीतिक प्रयास को याद किया
नरेश
- 17 Mar 2026, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच मंगलवार को 1950 के दशक के स्वेज संकट का उल्लेख किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र में उस वक्त के भारतीय प्रतिनिधि वीके कृष्ण मेनन ने इस मामले के समाधान के लिए किए गए कूटनीतिक प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्ष 1956 में पहले इसरायल तथा बाद में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा मिस्र पर किया गया आक्रमण स्वेज संकट के नाम से जाना जाता है। यह आक्रमण स्वेज नहर पर पश्चिमी देशों का नियंत्रण पुनः स्थापित करने तथा मिस्र के राष्ट्रपति नासिर को सत्ता से हटाने के उद्देश्य से किया गया था।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "दुनिया होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से जूझ रही है। 70 साल पहले, यह उस समस्या से जूझ रहा था जिसे स्वेज़ संकट के नाम से जाना जाता है। "
उन्होंने कहा, "26 जुलाई 1956 को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज़ नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे पश्चिम में भारी हंगामा मच गया और युद्ध के बादल मंडराने लगे। संकट को सुलझाने के कूटनीतिक प्रयास के केंद्र में जो व्यक्ति था वह कोई और नहीं बल्कि वीके कृष्ण मेनन थे। वह सराहनीय रूप से सफल हुए लेकिन केवल कुछ समय के लिए।"
उनके मुताबिक, 29 अक्टूबर 1956 को ब्रिटेन, फ्रांस और इज़राइल ने मिस्र पर आक्रमण शुरू किया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के हस्तक्षेप के बाद उन्हें कुछ ही दिनों में अपमानजनक तरीके से इस अभियान को रद्द करना पड़ा।
रमेश का कहना था, " विडंबना यह है कि यह वही व्यक्ति था जिसने तीन साल पहले ईरान के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री मुहम्मद मुसद्दिक़ को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त अभियान को मंजूरी दी थी, जिन्होंने वहां तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था।"
कांग्रेस नेता ने कहा कि नवंबर 1956 की शुरुआत में मिस्र पर आक्रमण रोके जाने के बाद, मिस्र-इज़राइल सीमा पर सिनाई और गाजा पर संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल तैनात किया गया था तो 10 देशों (भारत सहित) से ली गई यह सेना जून 1967 की शुरुआत तक सक्रिय थी।
उनके अनुसार, दिसंबर 1959 से जनवरी 1964 तक इसके कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीएस ज्ञानी थे, और जनवरी 1966 से जून 1967 तक मेजर जनरल इंदर जीत रिक्ये ने इसका नेतृत्व किया।
रमेश ने एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए कहा, " नेहरू ने स्वयं 20 मई 1960 को गाजा पट्टी में भारतीय दल को संबोधित किया था। संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल के प्रस्थान के तुरंत बाद छह दिवसीय युद्ध हुआ। यहां (तस्वीर में) कृष्ण मेनन अपनी व्यस्त कूटनीति के दौरान नासिर, एंटनी ईडन और सेल्विन लॉयड के साथ हैं।"
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1703 1856 दिल्ली