पाकिस्तान से समर्थन जुटाने के लिए राष्ट्रीय हितों को प्रभावित होने देती है कांग्रेस: मोदी
वैभव मनीषा
- 20 May 2024, 02:57 PM
- Updated: 02:57 PM
भुवनेश्वर, 20 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर चुनावी फायदे के लिए पाकिस्तान के नेताओं से समर्थन जुटाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब पाकिस्तान से सौदेबाजी की बात आती है तो विपक्षी पार्टी अक्सर राष्ट्र हित को प्रभावित होने देती है।
मोदी ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए विशेष साक्षात्कार के दौरान, पुलवामा में 2019 में हुए आतंकी हमले के जवाब में वायु सेना द्वारा बालाकोट में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेताओं के बयानों के लिए भी पार्टी को आड़े हाथ लिया।
भारत में चुनाव को लेकर पाकिस्तान के नेताओं के बयानों के संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए मोदी ने कहा, ‘‘खैर, पाकिस्तान के नेता कांग्रेस पार्टी के ‘शहजादे’ का समर्थन करके भारत के चुनावी विमर्श में प्रवेश कर रहे हैं।’’
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया था और उनकी प्रशंसा की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘शायद कांग्रेस पार्टी को लगता है कि इस तरह समर्थन जुटाने से उसे फायदा होगा। इस तरह वे जमीनी हकीकतों से कटे हुए हैं। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान में ऐसे लोग क्यों सोचते हैं कि कांग्रेस उनके लिए अच्छी है। कांग्रेस ने अक्सर पाकिस्तान के मामले में हमारे राष्ट्रीय हित को प्रभावित होने दिया है।’’
मोदी ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस के एक नेता कहते हैं कि हमारे बहादुर पुलिस कर्मियों की हत्या के लिए पाकिस्तानी आतंकी जिम्मेदार नहीं थे। उनके मुख्यमंत्री पांच साल बाद भी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते हैं। उनके वरिष्ठ नेता कहते हैं कि भारत को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु बम हैं। कांग्रेस के नेता प्रचार के दौरान जो कह रहे हैं, क्या कोई उसे स्वीकार कर सकता है।’’
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने एक पुराने साक्षात्कार में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सकता है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक पर संदेह जताया था और कहा था कि कोई नहीं जानता कि ऐसा कुछ हुआ था।
भाषा वैभव