आजीविका मिशन की दीदियां मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को कर रही हैं सशक्त : मुख्यमंत्री यादव
ब्रजेन्द्र रवि कांत
- 25 Feb 2026, 11:06 PM
- Updated: 11:06 PM
भोपाल, 25 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियों को एकता की शक्ति का सजीव उदाहरण करार देते हुए कहा कि इन बहनों के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने यहां स्वसहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला की शुरुआत कर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, "बहनें आज ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चलाने के साथ गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे कार्य भी कर रही हैं। कैफे संचालन से लेकर मार्केट का टारगेट पूरा करने में अव्वल बहनें अचार, पापड़ निर्माण सहित कई छोटे उद्योगों से बेहतर कमाई कर रही हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृ सत्ता का विशेष महत्व है और राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बहनें सशक्त हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पांच लाख स्व-सहायता समूहों से 65 लाख से अधिक दीदियां जुड़कर सशक्त हुई हैं और इनमें से 12 लाख से अधिक दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में विभिन्न कंपनी और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपये का व्यापार किया है।
यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का सर्वाधिक प्राकृतिक खेती वाला राज्य है और स्व-सहायता समूहों की 50 हजार बहनें प्राकृतिक खेती में जुटी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में महिला बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। साथ ही बजट का कुल 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाएगा।
यादव ने कार्यशाला में विभिन्न जिलों के स्व सहायता समूहों की दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न उत्पादों के स्टालों का अवलोकन कर दीदियों से चर्चा भी की। उन्होंने इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूहों की पांच दीदियों को सम्मानित भी किया।
यादव ने कहा कि राज्य सरकार बहनों को प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने कहा, "बहनें अपने समूह की शक्ति को बढ़ाएं और नयी मंजिलें प्राप्त करें, राज्य सरकार सदैव उनके साथ है। "
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की शुरुआत अगस्त 2018 में हुई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं के सशक्त समूह बनाकर उनका संस्थागत विकास तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत
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