छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं : मुख्यमंत्री साय
संजीव रवि कांत
- 25 Feb 2026, 10:56 PM
- Updated: 10:56 PM
रायपुर, 25 फरवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर से नक्सलवाद को खत्म करने के पीछे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का दावा करने वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
उन्होंने इसे 'गलत जानकारी' बताते हुए कहा कि सरकार का मकसद वहां खेती, सिंचाई, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बुधवार को कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए साय ने कहा, "..ऐसा आरोप है कि वहां उद्योगपतियों को बसाने के लिए नक्सलवाद खत्म किया जा रहा है। मैं राज्य और बस्तर के लोगों को बताना चाहता हूं कि यह पूरी तरह से गुमराह करने वाला दुष्प्रचार है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बस्तर में खेती को बढ़ावा देना, सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाना और जंगल की पैदावार के वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार पैदा करना है।
उन्होंने कहा कि इलाके के घने जंगलों और झरनों का फायदा उठाकर पर्यटन को बढ़ावा देना और 'होमस्टे' की पहल को बढ़ावा देना भी प्राथमिकताएं हैं।
साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय से विकास में एक बड़ी रुकावट बना हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत इच्छाशक्ति तथा मार्गदर्शन की वजह से अब यह खत्म होने की राह पर है।
उन्होंने कहा कि देश से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च, 2026 की समय सीमा तय की गई है।
उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के साहस और बलिदान को प्रणाम किया।
साय ने कहा कि 'नियाद नेल्लनार योजना' के जरिए अब गांवों तक विकास पहुंच रहा है और साथ ही दावा किया कि माओवादियों की केंद्रीय कमेटी के सदस्य हिडमा (जो पिछले साल पड़ोसी आंध्र प्रदेश में एक मुठभेड़ में मारा गया था) की मां भी सरकार द्वारा खोले गए एक अस्पताल में इलाज करा रही हैं।
भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए साय ने आरोप लगाया कि उनके पांच साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार ने राज्य को 'खोखला' कर दिया था।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने दावा किया कि कोयला, शराब, महादेव सट्टा ऐप और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड से जुड़े घोटाले सामने आए हैं।
साय ने कहा कि पहले भ्रष्टाचार में खोए गए फंड अब राज्य के खजाने में जमा किए जा रहे हैं और कल्याणकारी योजनाएं चलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में 2021 में आबकारी राजस्व 5,110 करोड़ रुपये था, जो उनकी सरकार में 2025-26 में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह खनिज राजस्व 2021-22 में 12,305 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 16,500 करोड़ रुपये हो गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के नाम पर युवा मित्र क्लब बनाए थे, लेकिन वे भी भ्रष्टाचार से ग्रसित थे।
उन्होंने दावा किया कि युवा मित्र क्लब का खर्च सिर्फ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैलियों में ही दिखता था। भ्रष्टाचार के बाद बचे समय में, वे सत्ता के लिए लड़ते रहे। ढाई साल के फॉर्मूले (मुख्यमंत्री पद के लिए) पर खींचतान पूरे कार्यकाल में जारी रही।
साय ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के लोगों को कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा, "मुझे गर्व है कि हमारी सरकार ने कांग्रेस राज में फैले भ्रष्टाचार की गंदगी को साफ किया है। पहले कहा जाता था कि भ्रष्टाचार के मामलों में छोटी मछलियां पकड़ी जाती थीं और मगरमच्छों को छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब राज्य को लूटने वाले मगरमच्छ सलाखों के पीछे हैं। जो बचे हैं वे भी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।"
इससे पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ असरदार कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार की तारीफ होनी चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों में एक नया डर पैदा हो गया है, जो जंगलों, अबूझमाड़ और बैलाडीला की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासियों के लिए जंगल सिर्फ जमीन नहीं बल्कि आस्था और रोजी-रोटी का मामला भी है।
लखमा ने आरोप लगाया कि किसान बहुत मुश्किल में हैं और दावा किया कि उन्हें अपना धान बेचने में मुश्किल हो रही है। राज्य में अपराध, बलात्कार और गोलीबारी की बढ़ती घटनाओं का जिक्र करते हुए लखमा ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ कानून-व्यवस्था के मामले में दूसरे राज्यों से पीछे है।
लखमा को पिछले साल जनवरी में कथित शराब घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। उन्हें हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम जमानत दी है।
भाषा
संजीव रवि कांत
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