बंगाल एसआईआर: दावों के सत्यापन के लिए झारखंड, ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की मंजूरी
नेत्रपाल
- 24 Feb 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 80 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए 250 जिला न्यायाधीशों के अलावा दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती और पड़ोसी राज्यों झारखंड एवं ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की मंगलवार को अनुमति दे दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के 22 फरवरी के पत्र का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर कवायद के लिए तैनात 250 जिला न्यायाधीशों को दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में लगभग 80 दिन लगेंगे।
प्रधान न्यायाधीश ने इस तथ्य पर गौर करते हुए कई नए निर्देश जारी किए कि अगर प्रत्येक न्यायिक अधिकारी रोजाना 250 दावों और आपत्तियों पर भी विचार करे, तो इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 80 दिन लगेंगे। पश्चिम बंगाल के लिए एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी है।
पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को मतदाताओं की ओर से दायर दावों और आपत्तियों के सत्यापन के लिए वरिष्ठ और कनिष्ठ डिविजन के कम से कम तीन साल के अनुभव वाले दीवानी न्यायाधीशों को तैनात करने की अनुमति दे दी।
उसने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह झारखंड और ओडिशा के अपने समकक्षों से स्थिति से निपटने के लिए समान रैंक के न्यायिक अधिकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध करें।
पीठ ने कहा, ''अगर कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय है कि और अधिक मानव संसाधन की जरूरत है, तो वह झारखंड और उड़ीसा के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से समान रैंक के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं।''
इसने कहा कि झारखंड और ओडिशा दोनों ही कभी बंगाल का हिस्सा थे और वहां के लोग पश्चिम बंगाल की भाषा से वाकिफ हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की यात्रा, मानदेय और तैनाती संबंधी अन्य खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा।
इसने झारखंड और उड़ीसा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक और तत्काल विचार करने को कहा।
पीठ ने कहा, ''इस प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारी दावों और आपत्तियों का सत्यापन पश्चिम बंगाल में एसआईआर की शुरुआत की घोषणा करने वाली 24 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना में उल्लिखित दस्तावेजों और इस अदालत की ओर से आठ सितंबर 2025 को पारित आदेश (जिसके तहत आधार कार्ड को स्वीकार करने की अनुमति दी गई थी) तथा 19 जनवरी 2026 को पारित आदेश (जिसके तहत माध्यमिक परीक्षा (कक्षा 10) के प्रवेश पत्र एवं माध्यमिक परीक्षा के उत्तीर्ण प्रमाण पत्र भी पेश करने की अनुमति दी गई थी) के आधार पर करेंगे।''
इसने कहा, ''हम निर्देश देते हैं कि 14 फरवरी 2026 की अंतिम तिथि तक या उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक रूप से पेश किए गए सभी दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा।''
पीठ ने कहा कि जिन दस्तावेजों का जिक्र किया गया है, उनके संबंध में न्यायिक अधिकारियों को संतुष्ट करना मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की जिम्मेदारी होगी।
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति भी दे दी। इसने स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया में प्रगति के आधार पर आयोग पूरक सूचियां जारी कर सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत प्रदत्त पूर्ण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए निर्देश दिया कि पूरक मतदाता सूचियों में शामिल मतदाता निर्वाचन आयोग की ओर से 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची का हिस्सा होंगे।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने पीठ को बताया कि फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है और देशभर में फर्जी आधार कार्ड के अधिकतर मामले बंगाल से हैं।
उपाध्याय ने कहा, ''पूरे देश में यह व्यावहारिक रूप से देखा जा रहा है कि अधिकतर आधार कार्ड सीमावर्ती जिलों में बनाए जाते हैं। अगर न्यायालय फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए एक नियम जोड़ दे तो...। पुलिस जब भी बांग्लादेशियों या रोहिंग्याओं को हिरासत में लेती है, तो उनका आधार कार्ड बंगाल का ही मिलता है। यही वास्तविक स्थिति है।''
प्रधान न्यायाधीश ने उपाध्याय से कहा, ''इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन यह समय इसके लिए उपयुक्त नहीं है। कोई हमें गलत न समझ ले, लेकिन पहले सही माहौल बनने दें।''
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ''आप भारत सरकार से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करने का अनुरोध करें... यह हमेशा हमारे मंच के समक्ष चर्चा का विषय नहीं हो सकता।''
उन्होंने कहा, ''अगर आधार कार्ड बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से हासिल किया गया है, तो इसे कानूनी रूप से विनियमित करना आवश्यक है। चूंकि, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन किया गया था और आधार को पहचान प्रमाण के रूप में शामिल किया गया था, इसलिए हमें इसे स्वीकार करना होगा।''
पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच जारी गतिरोध से नाखुश शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को राज्य में विवादों से घिरी एसआईआर कवायद में आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का एक ''असाधारण'' निर्देश जारी किया था।
न्यायालय ने नौ फरवरी को सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को स्पष्ट किया था कि वह किसी को भी एसआईआर कवायद को पूरा करने में बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। इसने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शरारती तत्वों को जारी एसआईआर संबंधी नोटिस जलाने के निर्वाचन आयोग के आरोप पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
भाषा पारुल नेत्रपाल
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