महाराष्ट्र की कल्याण सीट पर चुनाव मुख्यमंत्री शिंदे के बेटे के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न
प्रीति शोभना
- 19 May 2024, 03:23 PM
- Updated: 03:23 PM
(निखिल देशमुख)
मुंबई, 19 मई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे पिछले दो लोकसभा चुनावों में कल्याण सीट पर आसानी से जीत हासिल कर रहे थे, लेकिन अब शिवसेना में विभाजन हो जाने से उनके लिए यह मुकाबला इतना आसान नहीं प्रतीत हो रहा।
कल्याण लोकसभा सीट ठाणे जिले के अंतर्गत आती है और यह मुंबई के पास है। यहां 20 मई को मतदान होगा।
श्रीकांत शिंदे ने साल 2014 में राजनीति में प्रवेश करते हुए तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में पहली बार कल्याण सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने 2,50,749 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में वह 3,44,343 मतों के अंतर से दोबारा विजयी रहे थे।
श्रीकांत के पिता एकनाथ द्वारा तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे से अलग होने और जून 2022 में मुख्यमंत्री बनने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने के बाद से राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल गया है।
श्रीकांत शिंदे के इस बार चुनाव लड़ने पर अनिश्चितता बनी हुई थी क्योंकि भाजपा को लगा था कि वह महाराष्ट्र की अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी और उसके नेता और डोंबिवली से विधायक रवींद्र चव्हाण कल्याण सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे।
कल्याण निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभाएं आती हैं जिनमें से डोंबिवली सहित तीन सीट पर भाजपा के विधायक हैं जबकि एक-एक सीट पर शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक हैं। इस क्षेत्र में भाजपा के तीन विधायक होने से पार्टी ने कल्याण लोकसभा सीट के लिए अपना दावा ठोक दिया, लेकिन एकनाथ शिंदे भी इस बात पर अड़े रहे कि उनकी पार्टी यह सीट नहीं छोड़ेगी।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने श्रीकांत शिंदे के खिलाफ पूर्व पार्षद वैशाली दरेकर-राणे को मैदान में उतारा है। राणे ने 2009 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें एक लाख से अधिक मत मिले थे, लेकिन वह हार गई थीं।
कंप्यूटर विक्रेता और डोंबिवली के निवासी श्रीकांत कुलकर्णी ने कहा कि पिछले दो दशकों में कल्याण और डोंबिवली नगर निगम क्षेत्र में बढ़ती आबादी के कारण जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुनियादी ढांचे का बहुत अधिक विकास नहीं हुआ। हमें कोई अच्छा सरकारी अस्पताल नहीं मिला। जिन रेलवे स्टेशनों का प्रतिदिन लाखों लोग उपयोग करते हैं वे भी इतने बड़े नहीं हैं और कभी साफ-सुथरे नहीं होते। सड़कें संकरी हैं और विक्रेता फुटपाथों पर कब्जा कर लेते हैं।''
दूसरी ओर, कल्याण शहर की निवासी सुमन वलेचा ने दावा किया कि विकास कार्यों में तेजी आई है और सभी समस्याओं के लिए सांसद शिंदे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
कल्याण लोकसभा सीट पर जनसांख्यिकी विविध है। डोंबिवली में बड़ी संख्या में महाराष्ट्र के मूल निवासी और दक्षिण भारतीय लोग रहते हैं। उल्हासनगर मुख्य रूप से सिंधी क्षेत्र है, जबकि कल्याण शहर और कल्याण ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में गुजराती और मराठी भाषी आबादी है। अंबरनाथ में सिंधी, गुजराती और महाराष्ट्र के लोग रहते हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली मुंब्रा-कलवा विधानसभा सीट पर बड़ी संख्या में मुस्लिम हैं।
वैशाली दारेकर-राणे ने दावा किया कि लोग वर्तमान शासन से परेशान हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, "कल्याण लोकसभा सीट पर खराब बुनियादी ढांचे और शहरी नियोजन की कमी है। आबादी अधिक होने के बावजूद प्रमुख शहरी क्षेत्रों में पीने के पानी की कोई सुनिश्चित आपूर्ति नहीं है। प्रत्येक शहरी क्षेत्र को केवल कुछ घंटों के लिए पेयजल मिलता है।''
इन मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर श्रीकांत शिंदे ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि बढ़ती आबादी, पानी की उपलब्धता और अच्छा संचार नेटवर्क कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर मुझे काम करना है। मैंने कई सड़क परियोजनाओं को पूरा करने, पाइपलाइन बदलने और नए पुलों के निर्माण के लिए प्रशासन पर बहुत दबाव डाला है। कुछ योजनाओं पर काम जारी है।
श्रीकांत शिंदे ने यह भी दावा किया कि लोगों ने महाराष्ट्र में भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने के उनके पिता के फैसले का समर्थन किया है।
भाषा प्रीति