मूसेवाला की हत्या और जाफराबाद में दोहरे हत्याकांड में वांछित अपराधी गिरफ्तार
वैभव
- 18 Feb 2026, 10:47 PM
- Updated: 10:47 PM
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दो भाइयों की हत्या सहित कई आपराधिक मामलों में वांछित एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आरोपी की पहचान महफूज अली (45) उर्फ बॉबी कबूतर के रूप में हुई है, जिसे मंगलवार रात महिपालपुर के पास दो पुरुषों और एक महिला के साथ एसयूवी में सवार होकर जाते समय पकड़ा गया।
पुलिस सूत्रों का दावा कि कबूतर पंजाब के मानसा जिले में 2022 में पंजाबी गायक-रैपर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के सिलसिले में भी वांछित था। उस पर हत्या से कुछ दिन पहले गायक की गतिविधियों की रेकी करने का संदेह है।
जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि मूसेवाला हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए हथियार कबूतर और उसके सहयोगियों के माध्यम से प्राप्त किए गए थे या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को महिपालपुर इलाके में आधी रात के करीब वाहन को रोका गया। इस कार्रवाई के दौरान वाहन में सवार लोगों से कथित तौर पर हथियार बरामद किए गए, जिसके बाद उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बताया कि कबूतर कई आपराधिक मामलों में वांछित था, जिनमें हत्या के कम से कम छह मामले शामिल हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में 16 दिसंबर, 2025 को दो भाइयों- फजील और नदीम की हत्या के मामलों में भी उसकी तलाश थी।
पुलिस ने बताया कि कबूतर पर हाशिम बाबा गिरोह से जुड़ा एक प्रमुख शूटर होने का संदेह है और वह गिरोह की प्रतिद्वंद्विता और क्षेत्रीय विवादों से संबंधित कई हत्याओं में कथित तौर पर शामिल रहा है।
जांचकर्ता ग्रेटर कैलाश क्षेत्र में सितंबर 2024 में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या में उसकी संदिग्ध भूमिका की भी जांच कर रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि कबूतर को उसका उपनाम तब मिला जब वह अपनी युवावस्था में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चौहान बंगर इलाके में अपने घर की छत पर कबूतर पाला करता था। स्थानीय लोग उसे 'बॉबी कबूतर' कहकर बुलाते थे, जो नाम बाद में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।
कबूतर लगभग एक दशक से दिल्ली पुलिस की वांछित सूची में था और कई छापों के बावजूद गिरफ्तारी से बचता रहा था। आरोप है कि इलाके में उसके रिश्तेदारों और साथियों ने उसकी मदद की थी। एक अधिकारी ने बताया कि चौहान बंगर की संकरी गलियां और आपस में जुड़ी हुई छतें अक्सर उसे छापेमारी के दौरान पुलिस से बचने में सहायक होती थीं।
भाषा आशीष वैभव
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