उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति को रद्द किया
खारी
- 18 Feb 2026, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
नैनीताल, 18 फरवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को निर्धारित नियमों के विपरीत बताते हुए बुधवार को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
मुख्य अभियंता राजीव गुप्ता और अन्य की ओर से दायर याचिका में 10 सितंबर 2022 को जारी सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ध्यानी को प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार का आदेश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, नियमित चयन प्रक्रिया लंबित होने के कारण यह पदभार सबसे वरिष्ठ पात्र अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए था।
उन्होंने दलील दी कि उत्तराखंड प्रबंध निदेशक एवं निदेशकों के चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारण नियम, 2021 के नियम 9-ए के तहत इस पद के लिए इंजीनियरिंग स्नातक की योग्यता अनिवार्य है, जो कथित तौर पर ध्यानी के पास नहीं है।
याचिका स्वीकार करते हुए पीठ ने माना कि नियुक्ति में नियम 9-ए का उल्लंघन हुआ।
अदालत ने कहा कि 2021 के नियमों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं तब तक अनिवार्य हैं जब तक कानूनी रूप से वैध छूट न दी जाए और इस मामले में राज्य सरकार यह स्पष्ट रूप से साबित करने में विफल रही कि नियम 9-ए के तहत छूट का उचित उपयोग किया गया था।
अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस या तर्कसंगत आधार नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि किसी वैकल्पिक योग्यता को आवश्यक डिग्री के समकक्ष स्वीकार किया गया था, इसलिए नियुक्ति को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता।
आदेश में कहा गया है कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन कोई भी नया निर्णय 2021 के नियमों के सख्त अनुपालन में होना चाहिए।
इसमें कहा गया कि यदि दोबारा छूट दी जाती है तो सरकार को वस्तुनिष्ठ और दस्तावेजी आधार प्रस्तुत करना होगा तथा स्पष्ट करना होगा कि योग्यता की समतुल्यता कैसे निर्धारित की गई।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने प्रतिवादी की योग्यता, नेतृत्व क्षमता या पद के लिए उपयुक्तता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
इसने कहा कि नयी नियुक्ति होने तक उत्तराखंड सरकार कानून के अनुसार अंतरिम व्यवस्था कर सकती है।
भाषा सं दीप्ति खारी
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