भारत रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है : जयशंकर
रंजन
- 14 Feb 2026, 11:33 PM
- Updated: 11:33 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत अपनी ''रणनीतिक स्वायत्तता'' की नीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देश की ऊर्जा खरीद लागत, जोखिम और उपलब्धता जैसे कारकों से तय होगी।
जयशंकर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अमेरिका ने दावा किया है कि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है।
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान जयशंकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार ''जटिल'' है और भारत की तेल कंपनियां वही निर्णय लेंगी जो उन्हें अपने सर्वोत्तम हित में लगेगा।
उन्होंने कहा, ''हम रणनीतिक स्वायत्तता से पूरी तरह जुड़े हुए हैं क्योंकि यह हमारे इतिहास और हमारे विकास का हिस्सा रही है। यह बहुत गहरी अवधारणा है और यह एक ऐसा मुद्दा है जो राजनीतिक मतभेदों से भी परे है।''
जयशंकर ने कहा, ''आज ऊर्जा बाजार बेहद जटिल है। मुझे लगता है कि यूरोप और शायद दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह ही भारत की तेल कंपनियां भी उपलब्धता, लागत और जोखिम को देखते हुए निर्णय लेती हैं, जो उन्हें अपने सर्वोत्तम हित में लगता है।''
विदेश मंत्री उस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या भारत किसी व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और क्या ऐसा कदम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को प्रभावित कर सकता है।
भारत ने अभी तक वाशिंगटन के इस दावे की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है कि उसने रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता जताई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने घोषणा की कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क (टैरिफ) को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस कटौती में वह 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था, जो ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया था।
जयशंकर ने कहा कि भारत स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का विकल्प बनाए रखता है और हमेशा पश्चिमी साझेदारों से सहमत होना जरूरी नहीं है।
उन्होंने कहा, ''हम जरूरी नहीं कि हर मुद्दे पर सहमत हों, लेकिन मुझे विश्वास है कि यदि साझा आधार और समानताओं को तलाशने की इच्छा हो, तो वह संभव है।''
उन्होंने कहा, ''यदि आपके प्रश्न का सार यह है कि क्या मैं स्वतंत्र सोच रखूंगा, अपने फैसले खुद लूंगा और ऐसे विकल्प चुनूंगा जो आपकी सोच से मेल न भी खाएं- तो हां, ऐसा हो सकता है।''
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की भी जोरदार वकालत की, खासकर उन गहरे परिवर्तनों के संदर्भ में जो दुनिया हाल के वर्षों में देख रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दुनिया ने कई झटके झेले हैं, जिनमें कोविड-19 महामारी, यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव, चीन का उदय और वैश्विक प्रणालियों पर उसका प्रभाव शामिल है। ये सभी घटनाक्रम संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करते हैं।
भाषा गोला रंजन
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