असम के मुख्यमंत्री हिमंत के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 16 फरवरी को सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
प्रशांत
- 14 Feb 2026, 06:43 PM
- Updated: 06:43 PM
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करने वाला है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि एक वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर एक समुदाय विशेष के लोगों पर राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय की वाद सूची के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ द्वारा इस मामले की सुनवाई किए जाने की संभावना है।
उच्चतम न्यायालय ने शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के अनुरोध वाली वाम नेताओं की एक याचिका पर सुनवाई करने पर 10 फरवरी को सहमति जतायी थी।
शीर्ष अदालत ने असम में आसन्न विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा ''समस्या यह है कि चुनाव का कुछ हिस्सा उच्चतम न्यायालय में लड़ा जाता है।'' उसने वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का एक कथित वीडियो भारतीय जनता पार्टी की असम इकाई ने सात फरवरी को अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते से साझा किया था जिसमें शर्मा को राइफल से दो लोगों की ओर निशाना साधते हुए देखा जा सकता है -जिनमें से एक ने नमाजी टोपी पहनी है और दूसरे ने दाढ़ी रखी है।
इस वीडियो को लेकर व्यापक आक्रोश जताया गया और इसकी निंदा हुई थी। हिंसा और सांप्रदायिक नफरत भड़काने के आरोपों के बाद भाजपा ने पोस्ट को हटा लिया था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा ने अलग-अलग याचिकाएं दायर करके शर्मा के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। उनके अनुसार, कथित नफरत भरे इन भाषणों का उद्देश्य सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है।
याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए उच्चतम न्यायालय से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का भी अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती। याचिकाओं में शर्मा के कथित भड़काऊ भाषणों और बयानों का क्रमवार उल्लेख है।
इससे पहले, 12 लोगों द्वारा एक अलग याचिका दायर की गई थी, जिसमें संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा विभाजनकारी टिप्पणियां करने पर रोक लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
भाषा अमित प्रशांत
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