मंत्रिमंडल प्रस्ताव : पीएमओ के सेवा तीर्थ में स्थानांतरण को 'अतीत और भविष्य का संगम' बताया
प्रशांत
- 14 Feb 2026, 07:06 PM
- Updated: 07:06 PM
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से नवनिर्मित सेवा तीर्थ में स्थानांतरित करने के उपलक्ष्य में एक प्रस्ताव पारित किया है और इसे गुलामी के अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर एक कदम बताया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की शुक्रवार को साउथ ब्लॉक में हुई आखिरी बैठक के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को प्रस्ताव की विषय वस्तु संवाददाताओं के साथ साझा की। प्रस्ताव में कहा गया, ''आज हमें खुशी है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक आखिरी बार साउथ ब्लॉक के इस कक्ष में हो रही है। यह केवल स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है बल्कि यह इतिहास और भविष्य के मिलन का भी क्षण है।''
इसमें कहा गया, ''प्रतीकात्मक रूप से, यह देश का गुलामी के अतीत से 'विकसित भारत' के भविष्य की ओर एक और कदम है। बीते वर्षों में, देश में 'सत्ता' की संस्कृति के स्थान पर 'सेवा' की संस्कृति मजबूत हुई है। आज का यह परिवर्तन इन मूल्यों को और भी सुदृढ़ करेगा।''
वैष्णव ने कहा कि अंग्रेजों ने भारत पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण किया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद भी लगातार सरकारों ने इन इमारतों का इस्तेमाल अपने कार्यालय के लिए किया।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश राज के दौरान निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ने स्वतंत्रता के बाद शासन के केंद्र के रूप में कार्य किया और 16 प्रधानमंत्रियों के अधीन ऐतिहासिक निर्णयों के साक्षी रहे, जिन्होंने भारत को एक सुरक्षित, आत्मविश्वासी और अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रस्ताव में कहा गया कि आधुनिक, सेवा-उन्मुख शासन की ओर बदलाव को दर्शाते हुए, मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि ये भव्य इमारतें (नॉर्थ और साउथ ब्लॉक) 'युग-युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय' का हिस्सा बनेंगी, जो भारत की सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करेगा और आशा करता है कि यह हमारी हजारों साल पुरानी सभ्यता से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
इसमें कहा गया कि इस संग्रहालय में हमारी शाश्वत और अमर सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया जाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, ''केंद्रीय मंत्रिमंडल माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने शासन के केंद्र को औपनिवेशिक अतीत से नए भारत के 'सेवा तीर्थ' में परिवर्तित किया है।''
इसमें कहा गया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों द्वारा भारत को औपनिवेशिक शासन की जंजीरों में जकड़े रखने के लिए किया गया था।
प्रस्ताव के मुताबिक, ''इस परिसर ने गुलामी से लेकर आजादी और फिर स्वतंत्र भारत तक की कई ऐतिहासिक घटनाओं को देखा और आकार दिया है। इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में गठित मंत्रिमंडलों द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को भी देखा है।''
इसमें कहा गया है कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक के पदचिह्न इसकी सीढ़ियों पर अंकित हैं। इस इमारत की सीढ़ियों पर चढ़कर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रस्ताव के मुताबिक बीते दशकों में यहां आयोजित मंत्रिमंडल बैठकों के दौरान संविधान के आदर्शों, जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
इसमें कहा गया, ''यहां भारत की सफलताओं का जश्न मनाया गया, असफलताओं का आकलन किया गया और संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।''
प्रस्ताव के मुताबिक, ''साउथ ब्लॉक के कमरों ने विभाजन की भयावहता, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों और शांति काल के दौरान नीतियों पर विचार-विमर्श को देखा है। उसने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल शासन तक प्रौद्योगिकी की लंबी छलांग का अनुभव किया है।''
इसमें कहा गया, ''इन इमारतों में बैठकर, कई पीढ़ियों के अधिकारियों ने ऐसे निर्णय लिए जिन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारत को अनिश्चितता से बाहर निकाला और उसे स्थिरता के पथ पर आगे बढ़ाया। यह सभी के प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से उबरकर आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में खड़ा है।''
इसमें रेखांकित किया गया कि भारत आज दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और एक सुरक्षित तथा सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरा है। यह वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावी आवाज प्रस्तुत कर रहा है।
प्रस्ताव में कहा गया, "यह स्थान न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। यहीं से देश भर में सुधार की मुहिम को प्रोत्साहन मिला। यहीं से प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी), स्वच्छ भारत अभियान, गरीबों के कल्याण से संबंधित अभियान, डिजिटल इंडिया, जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों ने आकार लिया।''
इसमें कहा गया, ''यहीं से सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए, जैसे अनुच्छेद 370 की दीवार को गिराना और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना। यहीं से सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर जैसे निर्णय भी लिए गए, जिनके माध्यम से भारत ने दुनिया को अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासपूर्ण सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश दिया।''
प्रस्ताव के मुताबिक देश के विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ने के साथ, एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के अनुकूल कार्यालय और एक ऐसे कार्यक्षेत्र की आवश्यकता है जो यहां काम करने वाले प्रत्येक 'कर्मयोगी' की उत्पादकता को बढ़ाए और सेवा के प्रति उनके संकल्प को प्रोत्साहित करे।
मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है, ''इसी भावना के साथ, साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 साल बाद, आज 13 फरवरी 2026 को, भारत सरकार इन इमारतों को खाली कर रही है और 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवनों' में स्थानांतरित हो रही है।''
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत
1402 1906 दिल्ली