टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष ने 'ग्लोबल अयप्पा संगमम' के आयोजन में वित्तीय अनियमितता के आरोप खारिज किए
रंजन
- 13 Feb 2026, 04:15 PM
- Updated: 04:15 PM
तिरुवनंतपुरम, 13 फरवरी (भाषा) त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष पीएस प्रशांत ने पिछले साल आयोजित 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' के संचालन के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का शुक्रवार को खंडन किया। उन्होंने कहा कि आयोजन के खर्च के सिलसिले में गलत सूचना फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशांत ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' के आयोजन पर केवल तीन करोड़ रुपये खर्च हुए थे और पूरी राशि प्रायोजन के माध्यम से हासिल की गई थी।
पिछले साल सितंबर में टीडीबी अध्यक्ष के रूप में प्रशांत के कार्यकाल के दौरान केरल के पथनमतिट्टा स्थित पंपा में 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' का आयोजन किया गया था।
प्रशांत ने कहा कि प्रायोजन के रूप में एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी प्राप्त हुई थी।
उन्होंने कहा कि आयोजन संबंधी खर्चों के लिए "धार्मिक सम्मेलन और व्याख्यान" मद के तहत तीन करोड़ रुपये अग्रिम रूप से लिए गए थे, लेकिन प्रायोजन राशि हासिल होने के तुरंत बाद 17 अक्टूबर 2025 को पूरी राशि वापस कर दी गई।
प्रशांत ने दावा किया, "इस आयोजन के लिए देवास्वओम बोर्ड के कोष से अभी तक एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया है।"
उन्होंने देवस्वओम आयुक्त की ओर से चार नवंबर 2025 को केरल उच्च न्यायालय में पेश अंतरिम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें आयोजन पर कुल खर्च 4.5 करोड़ रुपये और उस पर लगने वाली जीएसटी राशि दिखाई गई थी।
प्रशांत ने कहा, "इस बात की जांच होनी चाहिए कि ताजा रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई है। इसके विवरण किसी भी व्यक्ति के सत्यापन के लिए उपलब्ध हैं।"
केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में 'ग्लोबल अय्यप्पा संगमम' की ऑडिट रिपोर्ट में कई मुद्दों और "गंभीर अनियमितताओं" का संज्ञान लिया है।
अदालत ने 11 फरवरी को आयोजन के खर्च पर विशेष आयुक्त की रिपोर्ट पर गौर किया। उसने कहा कि रिपोर्ट में कई मुद्दों को उजागर किया गया है, जैसे कि भारतीय अवसंरचना एवं निर्माण संस्थान (आईआईआईसी) को बिना निविदा या बोली प्रक्रिया के, व्यय के साथ-साथ 10 फीसदी सुविधा शुल्क या प्रशासनिक शुल्क पर काम सौंपा जाना।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, लकड़ी के फ्रेम वाली सेंटर टेबल और वीआईपी क्षेत्रों में भोजन परोसने के शुल्क आदि के सिलसिले में 'बिल ऑफ क्वांटिटी' (बीओक्यू) और 'जॉइंट मेजरमेंट शीट' (जेएमएस) में "गंभीर विसंगतियां" पाई गईं।
भाषा पारुल रंजन
रंजन
1302 1615 तिरुवनंतपुरम