भारत की विदेश नीति बहुध्रुवीय दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप : सरकार
सुरेश
- 12 Feb 2026, 09:18 PM
- Updated: 09:18 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाष) राज्यसभा में सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की विदेश नीति उसके ''व्यापक राष्ट्रीय हित'' द्वारा निर्देशित होती है तथा विभिन्न देशों के साथ संबंध पारस्परिक हितों के आधार पर निर्धारित होते हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने यह कहा कि ''रणनीतिक स्वायत्तता'' देश की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने प्रश्न किया था कि क्या सरकार ने रणनीतिक स्वायत्तता के नाम पर भारत की विदेश नीति में "विरोधाभासी संकेत" मिलने को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर गौर किया है?
सिंह ने कहा, ''भारत की विदेश नीति उसके व्यापक राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित है। रणनीतिक स्वायत्तता हमारी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। विभिन्न भागीदारों के साथ संबंध पारस्परिक लाभ के विचारों द्वारा निर्देशित होते हैं।''
उन्होंने कहा कि ऊर्जा और रक्षा से संबंधित निर्णय "सुरक्षा और उपलब्धता के साथ-साथ स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता" पर आधारित होते हैं।
विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा गया कि रूस के साथ निरंतर ऊर्जा व्यापार और सैन्य गतिविधियों का सामंजस्य भारत की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर प्रतिबद्धता और पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी के साथ कैसे बैठाया जा रहा है?
सिंह ने कहा, ''भारत की विदेश नीति बहुध्रुवीय दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप काम करती है।"
उन्होंने कहा, "विभिन्न गुटों द्वारा हमें एक विश्वसनीय भागीदार माना जाता है और यह बढ़ रही राजनयिक गतिविधियों में परिलक्षित होता है। पड़ोस में भी यही स्थिति (मौजूद) है, जहां भारत (पड़ोसी देशों से) मजबूत संबंध बनाए रखता है।"
राज्य मंत्री ने कहा कि अपने आसपास के पड़ोसी क्षेत्रों में सतत राजनीतिक और विकास गतिविधियों में भारत द्वारा विकास कार्यों के लिए वित्त पोषण करना, संकट की स्थितियों में प्रमुखता से सहायता प्रदान करना, लोगों के बीच संबंध स्थापित करना और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना शामिल है।
एक अन्य प्रश्न में, सरकार से पूछा गया कि क्या उसने हाल ही में एच-1बी वीजा संबंधी नीति और उससे जुड़ी कार्रवाई के मुद्दों के कारण अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों पर पड़ने वाले प्रभाव और इस वजह से भारत लौटने वाले भारतीय नागरिकों की संभावित संख्या का आकलन किया है।
सिंह ने कहा, "यद्यपि वीजा संबंधी निर्णय संप्रभुता का मामला हैं, पर भारत का मानना है कि कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही ने भारत और अमेरिका, दोनों में प्रौद्योगिकी उन्नति, नवाचार, आर्थिक विकास और संपत्ति निर्माण को बढ़ावा देने में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के संबद्ध पक्ष नवाचार-संचालित उद्योगों के लिए निरंतर समर्थन सुनिश्चित करने के वास्ते चर्चा कर रहे हैं।"
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 19 सितंबर, 2025 को अमेरिकी प्रशासन ने "कुछ गैर-आव्रजक श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध" शीर्षक से एक राष्ट्रपति घोषणा जारी की, जिसके तहत 21 सितंबर, 2025 को या उसके बाद दायर की गई कुछ नई एच-1बी याचिकाओं पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाया गया है।
इस घोषणा का उद्देश्य एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम में सुधार करके "दुरुपयोगों पर अंकुश लगाना और अमेरिकी श्रमिकों की रक्षा करना" था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद, 21 सितंबर, 2025 को अमेरिका की आव्रजन और नागरिकता सेवा (यूएससीआईएस) ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) जारी कर स्पष्ट किया कि 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क इन श्रेणियों पर लागू नहीं होता है- वे लोग जिनके पास पहले से ही एच-1बी वीजा है; वे लोग जिन्होंने 21 सितंबर, 2025 को पूर्वी समयानुसार रात 12:01 बजे से पहले एच-1बी याचिकाएं दायर की हैं; वे लोग जिन्होंने एच-1बी नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है; वे लोग जिनके पास वर्तमान में एच-1बी वीजा है और जो अमेरिका में आ-जा रहे हैं; और वे छात्र जो पहले से ही अमेरिका में हैं।
मंत्री ने कहा कि तीन दिसंबर, 2025 को, अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की कि 15 दिसंबर से, वह सभी एच-1बी आवेदकों और उनके आश्रितों (एच-4) की ऑनलाइन उपस्थिति की जांच करेगा ताकि अमेरिका में उनकी प्रवेश योग्यता निर्धारित की जा सके।
उन्होंने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप, दिसंबर 2025 में निर्धारित कई एच-1बी और एच-4 वीजा आवेदकों की कांसुलर नियुक्तियों को 2026 में नयी तारीखों पर पुनर्निर्धारित किया गया, जिससे बड़ी संख्या में आवेदक भारत में ही रह गए।"
सिंह ने बताया कि 29 दिसंबर, 2025 को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक नया नियम जारी किया, जिसके तहत "भारित चयन प्रक्रिया" लागू की गई है। यह प्रक्रिया आमतौर पर उच्च कौशल और अधिक वेतन पाने वाले विदेशी नागरिकों को एच-1बी वीजा आवंटित करने के पक्ष में होगी, जो 27 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगी।
सिंह ने कहा कि चूंकि उपरोक्त उपाय हाल ही में लागू किए गए हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों पर इसके प्रभाव के बारे में अभी तक "कोई तुलनात्मक आंकड़ा" उपलब्ध नहीं है।
भाषा माधव सुरेश
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