उच्चतम न्यायालय ने तलाक-ए-हसन के खिलाफ याचिका को मध्यस्थता के लिए भेजा
पवनेश
- 11 Feb 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक मुस्लिम महिला की अपने पति द्वारा दिये गये तलाक-ए-हसन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को बुधवार को मध्यस्थता के लिये भेज दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पत्रकार बेनजीर हीना की याचिका पर शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया।
तलाक-ए-हसन में मुस्लिम पुरुष तीन महीने की अवधि में हर महीने एक बार तलाक शब्द कहकर विवाह को खत्म कर सकता है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान हीना की ओर से पेश वकील सैयद रिजवान अहमद ने कहा कि पर्सनल लॉ की छूट अनियंत्रित नहीं हो सकती और ऐसी प्रथाएं कुरान में नहीं मिलतीं।
हीना के पति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एम आर शमशाद ने कहा कि तीन तलाक पत्नी के हलफनामे में दर्ज सत्यापित पते पर दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''अगर पत्नी तलाक से बच रही है, तो आप इसे उनकी ओर से नोटिस समझे जाने के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए अखबार में विज्ञापन भी दिया जा सकता है, वह भी नोटिस माना जाएगा।''
अदालत ने कहा, "प्रश्न व्यक्ति का है, धर्म का नहीं। जब दोनों पक्ष सौहार्दपूर्ण ढंग से अलग होना चाहते हैं तो उन्हें आपसी सम्मान बनाए रखना चाहिए।"
अहमद ने कहा कि हीना सुलह करना चाहती है और मामले में मध्यस्थता शुरू करने को तैयार है।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने के वास्ते तुरंत मध्यस्थता के लिए भेजना बेहद जरूरी है, ताकि शादी का कानूनी रूप से सही तरीके से अंत हो सके या कोई दूसरा रास्ता निकाला जा सके।
जटिल वैवाहिक विवादों को सुलझाने में व्यापक अनुभव के कारण, अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता केंद्र में भेजा और न्यायमूर्ति जोसेफ को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया।
दोनों पक्षों के वकीलों को बृहस्पतिवार तक न्यायमूर्ति जोसेफ से संपर्क करने और मध्यस्थता के लिए तारीख तय करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने न्यायमूर्ति जोसेफ को आदेश दिया कि वह चार हफ्ते के भीतर विवाद सुलझाने का प्रयास करें।
इसी तरह के एक मामले में, पीठ ने एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी अनपढ़ पत्नी को दिए गए तलाक-ए-हसन के अमल पर रोक लगा दी।
पीठ ने कहा, ''हम निर्देश देते हैं कि पक्षों को तब तक वैध रूप से विवाहित जोड़ा माना जाएगा जब तक कि पति आगे आकर यह नहीं दिखाता कि वैध तलाक दिया गया है। संबंधित थानेदार को पति के ठिकाने का पता लगाना होगा और इस अदालत के समक्ष उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।''
भाषा आशीष पवनेश
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