नीतीश कटारा हत्याकांड: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'फर्लो' पर रिहा करने की विकास यादव की अर्जी खारिज की
सुरेश
- 11 Feb 2026, 09:31 PM
- Updated: 09:31 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा की हत्या के जुर्म में बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा काट रहे विकास यादव की 'फर्लो' पर जेल से रिहा करने संबंधी याचिका बुधवार को खारिज कर दी।
विकास यादव ने फर्लो पर 21 दिनों के लिए जेल से रिहा करने का उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था।
फर्लो का मतलब जेल से अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या माफी। यह आमतौर पर उन दीर्घकालिक कैदियों को दी जाती है, जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया है।
विकास यादव की याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा ने कहा कि याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास और यह तथ्य कि उसने एक अन्य गंभीर हत्या मामले में जमानत पर रहते हुए भी अपराध किया, जो फर्लो देने के निर्णय में महत्वपूर्ण कारक है।
न्यायमूर्ति डुडेजा ने कहा कि यादव को ''गंभीर अपराध'' का दोषी ठहराया गया था और वह दिल्ली कारागार नियम (डीपीआर), 2018 के तहत फर्लो की राहत के लिए ''कानूनी रूप से अपात्र'' है।
न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है, इसलिए अधिकारियों ने कानून के अनुसार और उचित कारणों के आधार पर फर्लो देने से इनकार किया है, जिसे गलत या अविवेकपूर्ण नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि फर्लो एक "पूर्ण अधिकार" नहीं है और याचिकाकर्ता का मामला उसे "विवेकाधीन राहत" देने के योग्य नहीं है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''इसलिए रिट याचिका खारिज की जाती है।''
विकास यादव ने जेल प्रशासन के 29 अक्टूबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी 'फर्लो' अर्जी खारिज कर दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल अधिकारियों के फैसले में कोई मनमानी, गैरकानूनी बातें या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।
विकास यादव के वकील ने कहा कि वह पहले ही 23 साल और चार महीने से अधिक समय जेल में है तथा पिछले 12 वर्षों में जेल में उसका आचरण लगातार संतोषजनक रहा है।
उन्होंने कहा कि जेल अधिकारियों ने इस गलत धारणा के आधार पर उनके मुवक्किल के अनुरोध को खारिज कर दिया कि बिना छूट के सजा पाने वाला व्यक्ति 'फर्लो' का हकदार नहीं होता है।
विकास यादव उत्तर प्रदेश के नेता डी पी यादव का बेटा है। उसके चचेरे भाई विशाल यादव को भी कटारा के अपहरण और हत्या के जुर्म में सजा सुनाई गई थी।
ये दोनों कटारा और भारती यादव (विकास की बहन) के कथित प्रेम प्रसंग के खिलाफ थे, क्योंकि वे अलग-अलग जातियों से थे।
उच्चतम न्यायालय ने कटारा के सनसनीखेज अपहरण और हत्या में विकास यादव और विशाल यादव की भूमिका को लेकर तीन अक्टूबर 2016 को उन्हें बिना किसी छूट के 25 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई थी। सह-दोषी सुखदेव यादव को 20 वर्ष की कारावास की सजा सुनायी गयी थी।
उन्हें 16 और 17 फरवरी, 2002 की दरमियानी रात को एक शादी की पार्टी से कटारा का अपहरण करने और भारती के साथ कथित प्रेम संबंध के कारण उसकी हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था तथा सजा सुनाई गई थी।
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश
1102 2131 दिल्ली