असम-अरुणाचल सीमा विवाद: पक्के केसांग-विश्वनाथ जिले में सीमा पर पिलर लगाने का काम शुरू
सुरभि
- 11 Feb 2026, 12:24 PM
- Updated: 12:24 PM
ईटानगर, 11 फरवरी (भाषा) असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों से जारी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के पक्के केसांग जिले और असम के विश्वनाथ जिले की सीमा पर औपचारिक रूप से पिलर लगाने का काम शुरू हो गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
यह कार्य सोमवार को शुरू किया गया। इसकी निगरानी दोनों राज्यों के अधिकारियों के साथ-साथ 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' के माध्यम से केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी कर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए इससे पूर्व दोनों राज्यों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके बाद यह कदम सामने आया है जो दोनों पक्षों की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कदम से सीमा पर रहने वाले समुदायों के बीच स्पष्टता और स्थिरता आने के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों के बीच शांति, सद्भाव और सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
पक्के केसांग जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बियुराम वाहगे ने इसे ''ऐतिहासिक'' करार दिया।
वाहगे ने कहा, ''यह लंबे समय से लंबित सीमा विवाद को सुलझाने के लिए हस्ताक्षरित ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन के अनुरूप है, जिससे स्थायी शांति, सद्भाव और सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।''
उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनके असम के समकक्ष हिमंत विश्व शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस विवाद को सुलझाने को लिए जुलाई 2022 में 'नामसाई घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर के बाद में बड़ी प्रगति हुई, जिसने एक शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान की नींव रखी। दोनों राज्यों ने सहयोगात्मक और चरणबद्ध तरीका अपनाया, जिसमें पहले कम जटिल क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया।
जुलाई 2022 में 'नामसाई घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद इस विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी प्रगति हुई। इस घोषणापत्र ने दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की नींव रखी।
दोनों राज्यों ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सहयोगात्मक और चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया, जिसके तहत पहले कम जटिल क्षेत्रों के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों की क्षेत्रीय समितियां गठित की गईं, जिन्हें संयुक्त रूप से विवादित क्षेत्रों का दौरा करने, ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जांच करने तथा स्थानीय समुदायों के साथ संवाद के माध्यम से आपसी सहमति से समाधान निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
भाषा प्रचेता सुरभि
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