कई आसियान देशों के साथ भारत के संबंधों में साझा बौद्ध विरासत महत्वपूर्ण पहलू: सरकार
सुभाष
- 06 Feb 2026, 07:59 PM
- Updated: 07:59 PM
नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि कई आसियान देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय संबंधों में साझा बौद्ध विरासत एक महत्वपूर्ण पहलू है।
विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह भी कहा कि भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट' नीति का उद्देश्य आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और रणनीतिक संबंध विकसित करना है, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया के देश भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय से पूछा गया था कि हाल की 'बोधि यात्रा' और संबंधित पहल ने दक्षिण पूर्व एशिया में 'भारत की बौद्ध कूटनीति' को किस तरह आगे बढ़ाया है और आसियान देशों के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को किस तरह मजबूत किया है।
यह भी पूछा गया था कि सरकार सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से आसियान देशों के साथ जुड़ाव को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए कौन सी विशिष्ट दीर्घकालिक रणनीतियां बना रही है।
मार्गेरिटा ने कहा, ''भारत सरकार की एक्ट ईस्ट नीति का उद्देश्य आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और रणनीतिक संबंध विकसित करना है, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया के देश भी शामिल हैं। कई आसियान देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर संबंधों में साझा बौद्ध विरासत एक महत्वपूर्ण पहलू है।''
उन्होंने कहा कि बौद्ध भिक्षुओं, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की नियमित यात्राओं से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में, साझेदार देशों के अनुरोध पर, भारत सरकार ने दक्षिण पूर्व एशिया में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की दो महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों में शामिल करने की सुविधा प्रदान की।
पहली प्रदर्शनी, जो 22 फरवरी से 19 मार्च 2024 तक थाईलैंड में चार स्थानों पर आयोजित की गई थी, जिनमें बुद्ध और उनके शिष्यों के अवशेष शामिल थे और इनमें 40 लाख से अधिक श्रद्धालु आए। सरकार ने कहा कि दूसरी प्रदर्शनी 2 मई से 2 जून 2025 तक वियतनाम में आयोजित की गई थी, जहां संयुक्त राष्ट्र वेसाक समारोह के दौरान नौ स्थानों पर आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा की निशानियों को प्रदर्शित किया गया।
भाषा वैभव सुभाष
सुभाष
0602 1959 संसद