मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के गणतंत्र का एक शक्तिशाली आयाम है : राष्ट्रपति मुर्मू
नरेश
- 25 Jan 2026, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि महिलाओं का ''सक्रिय और समर्थ होना'' देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से लेकर कृषि, अंतरिक्ष और रक्षा तक विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रही हैं।
राष्ट्रपति ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ''हमारे गणतंत्र का एक शक्तिशाली आयाम है।''
उन्होंने कहा, ''महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।''
मुर्मू ने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है।
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री - जन धन योजना के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें महिलाओं के खाते लगभग 56 प्रतिशत हैं।''
विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को रेखंकित करते हुए मुर्मू ने कहा कि भारतीय महिलाएं ''परंपरागत रूढ़ियों को तोड़ रही हैं और आगे बढ़ रही हैं।'' उन्होंने कहा कि महिलाएं, खेत-खलिहान से लेकर अंतरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेना तक में अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा, ''10 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनें विकास की नयी परिभाषा लिख रही हैं।''
राष्ट्रपति ने खेल-कूद के क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा, ''हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नये प्रतिमान स्थापित किए हैं।'' उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर में, भारत की बेटियों ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप और उसके बाद दृष्टिहीन महिला टी20 विश्व कप जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचा है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष शतरंज विश्व कप का फाइनल मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला गया।
राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिला नीत विकास को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी और विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
भाषा सुभाष नरेश
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