मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन के दौरान पिता-पुत्र की हत्या करने के मामले में 13 लोगों को उम्रकैद
शफीक माधव
- 23 Dec 2025, 09:44 PM
- Updated: 09:44 PM
कोलकाता, 23 दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की एक अदालत ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान अप्रैल में पिता-पुत्र की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने के मामले में मंगलवार को 13 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
विशेष लोक अभियोजक बिवास चटर्जी ने दावा किया कि भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने का यह देश का दूसरा और पश्चिम बंगाल का पहला मामला है, जिसमें दोषसिद्धि हुई।
जांगीपुर की त्वरित अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
बारह अप्रैल को शमशेरगंज थाना क्षेत्र के जाफराबाद स्थित एक मकान में भीड़ ने हरगोबिंद दास (72) और उनके बेटे चंदन दास (42) की हत्या कर दी थी।
चटर्जी ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी क्योंकि यह अपराध दुर्लभतम श्रेणी में आता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में अपील करने के बारे में निर्णय लेगी।
अदालत ने सोमवार को 13 आरोपियों को दोषी करार दिया था।
सभी दोषियों को डकैती के लिए 10 साल, घर में जबरन घुसने के लिए 10 साल और दंगा करने के लिए पांच साल की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
संसद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम पारित होने के बाद आठ से 12 अप्रैल तक मुर्शिदाबाद जिले में हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
दास के परिवार ने कहा कि वह अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।
यहां भाजपा प्रदेश कार्यालय में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ संवाददाताओं से बात करते हुए, हरगोबिंद की पत्नी पारुल दास ने कहा, ‘‘हम तीन दोषियों के लिए मृत्युदंड चाहते हैं, जिनकी पहचान हमने पहले ही कर ली है। हम अदालत के आदेश से संतुष्ट नहीं हैं।’’
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि परिवार 13 दोषियों में से तीन के लिए मृत्युदंड का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगा और भाजपा इसमें उनकी सहायता करेगी।
भाजपा नेता ने दावा किया, ‘‘हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। 13 में से तीन ने मूर्तिकार पिता और पुत्र की मांस काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेजधार चाकुओं से हत्या कर दी थी। उनका कृत्य जिहादियों से कम नहीं है। अन्य 10 षड्यंत्रकर्ता थे और उन्होंने उन तीनों की मदद की थी।’’
भाषा शफीक