ग्रेटर नोएडा के गांवों में सीवर कनेक्शन सुनिश्चित करने के निर्देश
रवि कांत सुरेश
- 19 Dec 2025, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के कई गांवों में सभी घरों को उचित सीवर कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए एक समिति के गठन का निर्देश दिया है।
एनजीटी ने पांच फरवरी की रिपोर्ट से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। इस रिपोर्ट से पता चला है कि ग्रेटर नोएडा के अंतर्गत अधिसूचित 124 गांवों में से 115 गांवों में सीवर कनेक्शन के मुद्दे की जांच करने की आवश्यकता है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 15 दिसंबर को जारी एक आदेश में कहा कि रिपोर्ट से पता चला है कि ''ग्रामीणों में अपने घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने के प्रति आमतौर पर अनिच्छा है और निवासियों को जागरूक करने की आवश्यकता है।''
पीठ ने कहा कि ग्रामीण मवेशियों के गोबर को नालियों में बहा रहे हैं, जिससे नालियां जाम हो रही हैं और उनमें से पानी बह रहा है, साथ ही मल-मूत्र की मात्रा भी बढ़ रही है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने तर्क दिया कि औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह अधिसूचित गांवों में नियोजित विकास सुनिश्चित करे और सुविधाएं प्रदान करे।
अधिवक्ता वशिष्ठ ने खुली जमीन और सड़कों पर सीवेज के निर्वहन के संबंध में शिकायत उठाई थी।
हालांकि, जीएनआईडीए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने खुलासा किया कि उसके पास निगरानी की कोई शक्ति नहीं है। वकील ने कहा कि कुछ निवासियों द्वारा नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
एनजीटी ने कहा, ‘‘यदि कोई परिवार सीवर कनेक्शन स्वीकार नहीं करता है और पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अपशिष्ट पदार्थ का निर्वहन करता है, तो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उससे उचित पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जाए।’’
यूपीपीसीबी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि खुले नालों, तूफानी जल निकासी नालों या किसी अन्य जल निकाय में अनुपचारित सीवेज का निर्वहन न हो।
इस मामले पर अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।
भाषा रवि कांत