महाराष्ट्र में पडघा आईएसआईएस मॉड्यूल संरक्षित वनक्षेत्र से खैर की लकड़ियां काटकर करता था तस्करी
राजकुमार माधव
- 13 Dec 2025, 07:25 PM
- Updated: 07:25 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) आतंकी वित्त पोषण से संबंधित एक धनशोधन मामले की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गयी जांच से पता चला है कि महाराष्ट्र में ठाणे जिले के पडघा गांव से संचालित एक कथित आईएसआईएस मॉड्यूल स्थानीय संरक्षित वनों से खैर की लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी में शामिल था।
संघीय जांच एजेंसी ने 11 दिसंबर को दिल्ली, कोलकाता, हजारीबाग (झारखंड) और प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में विभिन्न ठिकानों पर छापा मारने के अलावा बोरीवली-पडघा के जुड़वां गांवों में भी तलाशी अभियान चलाया।
धनशोधन की यह जांच नवंबर 2023 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा पडघा स्थित प्रतिबंधित वैश्विक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के एक ‘अत्यधिक कट्टरपंथी’ मॉडयूल और भारत में इसके दिवंगत स्वघोषित नेता साकिब नाचन के खिलाफ दायर किए गए एक मामले से जुड़ी है।
निदेशालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि छापेमारी के दौरान उसने 3.70 करोड़ रुपये नकद के अलावा छह करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और सोना-चांदी जब्त किया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, वित्तीय विश्लेषण में पाया गया कि ‘बोरीवली-पडघा आईएसआईएस मॉडयूल से जुड़े विभिन्न व्यक्ति उक्त क्षेत्र के संरक्षित वन क्षेत्रों से कैथ वृक्षों की अवैध कटाई और तस्करी में शामिल थे।’
स्थानीय रूप से खैर के नाम से चर्चित इस पेड़ से कत्था (कैटेचू) निकाला जाता है, जिसका व्यापक रूप से पान में और आयुर्वेदिक औषधियों में एक घटक के रूप में उपयोग किया जाता है।
ईडी ने बताया कि कत्था के उत्पादन से जुड़ी विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के परिसरों पर छापा मारा गया, जो संदिग्धों से लकड़ी खरीद रही थीं। बृहस्पतिवार को तलाशी के दौरान बरामद की गई कुछ लकड़ी ईडी ने वन विभाग को सौंप दी।
एनआईए ने आरोप लगाया था कि पडघा मॉड्यूल भर्ती, प्रशिक्षण, हथियारों और विस्फोटकों की खरीद और अपने अभियानों को जारी रखने के लिए धन जुटाने में लगा हुआ था।
एनआईए ने इस मामले में आरोपपत्र में 21 लोगों को नामजद किया है, जिन पर युवाओं को आईएसआईएस की विचारधारा की सीख देकर भर्ती करने की साजिश रचने और तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का आरोप है।
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने ग्रामीण ठाणे के पडघा गांव को 'अल शाम' नामक एक ‘मुक्त क्षेत्र’ घोषित कर दिया था। वे आसानी से प्रभावित होने वाले मुस्लिम युवाओं को अपने निवास स्थान से पडघा में स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित कर रहे थे ताकि वे अपना आधार मजबूत कर सकें।
भाषा राजकुमार