भाजपा का राहुल पर निशाना: कहा- जो व्यक्ति अमेठी से चुनाव नहीं लड़ पाया, वह सरकार बनाने की बात कर रहा
अमित दिलीप
- 11 May 2024, 06:04 PM
- Updated: 06:04 PM
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बहस की चुनौती को तवज्जो नहीं देते हुए शनिवार को कहा कि वह ना तो अपनी पार्टी के अध्यक्ष हैं और ना ही विपक्ष के नेता।
भाजपा ने साथ ही मुद्दों पर राहुल गांधी के रुख और ज्ञान पर भी सवाल उठाया।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी पर उनके इस दावे को लेकर कटाक्ष भी किया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ लोकसभा चुनाव जीतेगा। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अमेठी से अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सका, वह केंद्र में सरकार बनाने की बात कर रहा है। गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में स्मृति ईरानी से हार गए थे। कांग्रेस ने इस बार गांधी को रायबरेली से मैदान में उतारा है और उनका मुकाबला भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह से है। कांग्रेस ने अमेठी में इस बार गांधी परिवार के करीबी किशोरी लाल शर्मा को ईरानी के खिलाफ मैदान में उतारा है।
त्रिवेदी ने सवाल किया कि गांधी किस हैसियत से मोदी से बहस करना चाह रहे हैं, क्योंकि वह अपनी पार्टी (कांग्रेस) के महज एक सांसद हैं।
कांग्रेस पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस में एक सांसद यात्रा का नेतृत्व करता है, जबकि संसद के दोनों सदनों में उसके नेता उसके पीछे खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, लेकिन पोस्टर गांधी के दिखाई दे रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश सहित कुछ प्रमुख नागरिकों ने हाल ही में मोदी और गांधी को पत्र लिखकर लोकसभा चुनाव पर सार्वजनिक बहस करने का आग्रह किया था। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने कहा कि वह ऐसी बहस के लिए तैयार हैं और दावा किया कि प्रधानमंत्री इसके लिए सहमत नहीं होंगे।
गांधी पर निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने संवाददाताओं से कहा कि गांधी ने हाल ही में आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के बारे में बात करते हुए अगड़ी जातियों और दलितों के प्रतिनिधित्व के मुद्दे का उल्लेख किया था, जिसे जवाहरलाल नेहरू ने विभिन्न देशों के सहयोग से स्थापित किया था।
उन्होंने कहा कि कोई उनके साथ बहस कर सकता है या नहीं, यह विभिन्न मुद्दों पर उनकी जानकारी के स्तर से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई और लोगों ने भी गांधी को बहस के लिए चुनौती दी है।
त्रिवेदी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत के बाद आम आदमी पार्टी में जश्न पर भी निशाना साधा और कहा कि वह जेल से लौटे नेताओं के एक विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अन्ना हजारे उनके (केजरीवाल) गुरु थे और अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव हैं, जिन्हें भ्रष्टाचार के कई मामलों में दोषी ठहराया गया है और इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखायी दे रहा है।
त्रिवेदी ने कहा कि कोई देख सकता है कि केजरीवाल ने जिस तथाकथित नयी राजनीति शुरू करने का दावा किया था, वह कांग्रेस के साथ में उसी पुरानी राजनीति में बदल गई है।
भाजपा नेता त्रिवेदी ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख नाना पटोले ने यह टिप्पणी करके आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया है कि विपक्ष के सत्ता में आने पर राम मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा।
पटोले ने मोदी पर राम मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा समारोह में धार्मिक नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।
त्रिवेदी ने कहा कि पटोले की टिप्पणी मुर्मू के मंदिर का दौरा करने के तुरंत बाद आयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुर्मू का घोर अपमान है और इसने वंचित समुदाय के प्रति कांग्रेस की दुर्भावना सामने आ गई है।
पटोले ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बारे में कुछ शंकराचार्यों की आलोचनात्मक टिप्पणियों का जिक्र किया था। त्रिवेदी ने कहा कि देश भर से आए सभी धर्मगुरुओं ने 1989 में "धर्म संसद" में राम मंदिर की मांग का समर्थन किया था और जिस व्यक्ति को "शिलान्यास" समारोह के लिए चुना गया था, वह एक दलित था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इन घटनाक्रमों का विरोध किया था।
त्रिवेदी ने कहा कि यह भाजपा के समान विचारधारा वाले संगठन हैं, जिन्होंने वंचित समुदायों की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए काम किया।
उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधने के लिए राम गोपाल यादव जैसे विपक्षी नेताओं और सैम पित्रोदा जैसे कांग्रेस सदस्यों की मंदिर के बारे में कथित आलोचनात्मक टिप्पणियों के अलावा द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) पदाधिकारियों की सनातन धर्म की आलोचना करने वाली पिछली टिप्पणियों का उल्लेख दिया।
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि सनातन धर्म को खत्म करने का उनका दावा केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहार में भी दिखायी देता है।
भाषा अमित