सीएपीएफ जवान जुर्माने और घरों से बेदखली के मामले में उच्चतम न्यायालय का रुख करने की तैयारी में
शफीक दिलीप
- 12 Dec 2025, 10:43 PM
- Updated: 10:43 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) नक्सलवाद, आतंकवाद और उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के सैकड़ों कर्मियों को जुर्माने का सामना करना पड़ रहा है और उनके परिवारों को घर से बेदखल किए जाने की आशंका है। ऐसे में उन्होंने मदद के लिए उच्चतम न्यायालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष गुहार लगाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली, कोलकाता और चंडीगढ़ जैसे महानगरों में अर्धसैनिक बलों के कर्मियों के परिवारों के रहने के लिए आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए ‘जनरल पूल रेजिडेंशियल अकॉमोडेशन’ (जीपीआरए) के संबंध में सीएपीएफ कर्मियों के खिलाफ जारी किए गए ‘‘प्रतिकूल आदेश’’ को लेकर जवान और अधिकारी अपने परिवारों और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
सीएपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘2017 तक, कर्मियों को जीपीआरए योजना के तहत इन शहरों में अपने परिवारों और बच्चों को तब तक रखने की अनुमति थी, जब तक वे दुर्गम क्षेत्रों में तैनात रहते थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उस वर्ष, आवास मंत्रालय द्वारा एक नया नियम लाया गया था, जिसके तहत इन जवानों और अधिकारियों को इन घरों का आवंटन केवल तीन वर्षों के लिए ही सीमित कर दिया गया था, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा और उनके परिवार के सदस्यों की चिकित्सा संबंधी जरूरतें खतरे में पड़ गईं।’’
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि प्रभावित जवानों और अधिकारियों में से कई ने 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, और न्यायालय ने शुरू में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के आदेश पर रोक लगा दी थी।
उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जुलाई में, उच्च न्यायालय ने अपना अंतिम आदेश जारी किया और कर्मियों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अब मंत्रालय द्वारा उन्हें ‘‘अधिक समय तक रहने’’ और ‘‘बेदखली’’ के लिए आर्थिक दंड के नोटिस भेजे जा रहे हैं।
एक जवान ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा, ‘‘हम कहां जाएं? हम लाखों रुपये के इतने भारी जुर्माने का भुगतान कैसे करें? एक मामले में, एक जवान पर हर्जाने के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह सब तब हो रहा है, जब हम अभी भी दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हैं और देश के सामने मौजूद प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला कर रहे हैं।’’
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय इस मामले से अवगत है और उसने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ बैठकें की हैं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जुर्माने की माफी और जीपीआरए योजना को 2017 नीति के तहत विस्तारित करने के संबंध में पूर्ण समाधान पर काम जारी है।’’
भाषा शफीक