उच्चतम न्यायालय ने फर्जी मुठभेड़ मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को जमानत दी
देवेंद्र सुरेश
- 11 May 2024, 05:17 PM
- Updated: 05:17 PM
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गैंगस्टर रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया के 2006 के फर्जी मुठभेड़ मामले में उम्रकैद की सजा पाए मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के वकील की इस दलील पर गौर किया कि अदालत द्वारा शर्मा को जमानत देने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता- मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा- पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व किया और पूर्व अधिकारी की जमानत याचिका का विरोध किया।
उच्चतम न्यायालय ने आठ अप्रैल को प्रदीप शर्मा को राहत देते हुए कहा था कि उन्हें 2006 के फर्जी मुठभेड़ मामले में मिली आजीवन कारावास की सजा भुगतने के लिए अगले आदेश तक आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं है।
बम्बई उच्च न्यायालय के 19 मार्च के फैसले के खिलाफ शर्मा की अपील स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा था, ‘‘यह बरी किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय द्वारा पलटने का मामला है, जिसमें अपील अपीलकर्ता द्वारा दायर की गई है। वैधानिक अपील सुनवाई के लिए स्वीकार की जाती है। जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया जाता है। उच्च न्यायालय ने उन्हें तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। सुनवाई की अगली तारीख तक उन्हें आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं है।’’
उच्च न्यायालय ने 19 मार्च को मामले में 13 अन्य आरोपियों, 12 पूर्व पुलिसकर्मियों और एक अन्य व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।
उच्च न्यायालय ने सबूतों की कमी के कारण शर्मा को बरी करने के सत्र न्यायालय द्वारा पारित 2013 के फैसले को रद्द कर दिया था।
ग्यारह नवंबर 2006 को, पुलिस के एक दल ने नवी मुंबई के वाशी इलाके से रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया और उनके दोस्त अनिल भेड़ा को हिरासत में लिया था और उसी शाम रामनारायण गुप्ता पश्चिमी मुंबई के वर्सोवा के निकट एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था।
गुप्ता का सहयोगी अनिल भेड़ा दिसंबर 2006 में रिहा हो गया था। हालांकि, जुलाई 2011 में, अदालत में गवाही देने से कुछ दिन पहले, भेड़ा का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। फिलहाल राज्य सीआईडी मामले की जांच कर रही है।
भेड़ा के मामले पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि आज तक सीआईडी ने जांच पूरी करने और अपराधियों का पता लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
शुरुआत में तेरह पुलिसकर्मियों सहित 22 लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के बाद 2013 में सत्र अदालत ने 21 आरोपियों को दोषी पाया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
वर्ष 2013 में सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव में शर्मा को बरी कर दिया था जबकि दो व्यक्तियों की हिरासत में मौत हो गई थी।
दोषी ठहराये गए व्यक्तियों ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी जबकि अभियोजन पक्ष और रामनारायण गुप्ता के भाई रामप्रसाद गुप्ता ने शर्मा को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी।
भाषा
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