‘नोट का जवाब नोटा’ से ‘तुम्हारा सिक्का खोटा’ तक: इंदौर में गूंज रहे नये चुनावी नारे
नेत्रपाल
- 11 May 2024, 05:05 PM
- Updated: 05:05 PM
इंदौर, 11 मई (भाषा) इंदौर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम की ऐन मौके पर नाम वापसी के तगड़े झटके के बाद पार्टी के "नोटा" के समर्थन में खुलकर मैदान में आने से सोशल मीडिया नये चुनावी नारों से दो-चार हो रहा है। ‘नोटा’ के पक्ष और विपक्ष में गढ़े गए इन नारों के जरिये कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 13 मई को होने वाले मतदान के मद्देजर जनमानस को अपने पाले में खींचने की कवायद में जुटी हैं।
इंदौर सीट के 72 साल के इतिहास में पहली बार चुनावी दौड़ से बाहर कांग्रेस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर उपलब्ध ‘नोटा’ (उपरोक्त में से कोई नहीं) के विकल्प को इंदौर को अपने समर्थित "प्रत्याशी" के तौर पर पेश करने की हर-मुमकिन कोशिश कर रही है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘नोटा’ के खिलाफ जोरदार अभियान छेड़ दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्थानीय मतदाताओं से आह्वान किया है कि वे "भाजपा को सबक सिखाने के लिए" इस बार ‘नोटा’ का इस्तेमाल करें।
उन्होंने एक हालिया कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भले ही इस बार इंदौर में हमारा प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है, लेकिन मतदान के दिन हर बूथ के पास कांग्रेस कार्यकर्ता टेबल-कुर्सी लगाकर बैठें और इस भाव से काम करें कि नोटा ही हमारा प्रत्याशी है।’’
पटवारी के इस आह्वान के बाद कांग्रेस के समर्थक "नोट का जवाब नोटा", "भाजपा ने काम किया खोटा, इसलिए इंदौर चुनेगा नोटा" और "भाजपा लोकतंत्र की हत्यारी है, अब नोटा दबाने की बारी है" जैसे नारों के बूते सोशल मीडिया पर अपना अभियान चला रहे हैं।
वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कांग्रेस के अपने समकक्ष पटवारी पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘आपका प्रत्याशी नामांकन वापसी के अंतिम वक्त में स्वेच्छा से अपना पर्चा वापस लेता है। जनता मूर्ख नहीं है। आपका सिक्का खोटा है और आप जनता से नोटा पर वोट डालने के लिए बोल रहे हैं। ऐसा थोड़ा ही चलेगा।"
शर्मा के इस बयान के बाद भाजपा के सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थक "तुम्हारा सिक्का खोटा, हम क्यों दबाएं नोटा" और "70 सालों का काम तुम्हारा खोटा, फिर क्यों चुनें हम नोटा" जैसे नारों के जरिये कांग्रेस पर जवाबी हमला कर रहे हैं।
भाजपा के ऐसे ही एक समर्थक द्वारा साझा की गई एक तुकबंदी में कहा गया, "नोटा-नोटा कांग्रेस करे, नोटा दबाए न कोए, ऐसी नौटंकी करनी पड़े, जब कोई साथ न होए"।
इंदौर में भाजपा के समर्थक ‘नोटा’ के विरोध को धार देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं।
इस वीडियो में भागवत एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह कहते सुनाई पड़ते हैं, "जब हम नोटा को चुनते हैं, तो हम ‘अवेलेबल बेस्ट’ (उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ प्रत्याशी) को भी किनारे कर देते हैं और इसका लाभ जो ‘अवेलेबल वर्स्ट’ (उपलब्ध उम्मीदवारों में सबसे खराब प्रत्याशी) हैं, उन्हें ही मिलता है। इसलिए भले ही नोटा का प्रावधान है, लेकिन मेरा मानना है कि नोटा का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए और हमें ‘अवेलेबल बेस्ट’ के पक्ष में जाना चाहिए।"
भाजपा का पिछले 35 साल से इंदौर लोकसभा सीट पर कब्जा है जहां पार्टी ने इस बार कम से कम आठ लाख वोट के अंतर से जीत का दावा किया है। भाजपा ने अपने निवर्तमान सांसद शंकर लालवानी को लगातार दूसरी बार इंदौर के चुनावी रण में उतारा है।
इंदौर मतदाताओं की तादाद के लिहाज से मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र है। इस सीट पर 25.13 लाख मतदाता 13 मई को 14 उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे जिनमें नौ निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं।
साल 2019 में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इंदौर में 69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तब इस सीट पर 5,045 मतदाताओं ने ‘‘नोटा’’ का विकल्प चुना था।
भाषा हर्ष