दिल्ली मेट्रो में महिलाओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित जागरूकता अभियान शुरू
जितेंद्र पारुल
- 10 Dec 2025, 05:13 PM
- Updated: 05:13 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर केंद्रित दिल्ली मेट्रो अभियान की शुरुआत बुधवार को सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन से की।
यह अभियान 10 दिसंबर से 10 जनवरी तक चलेगा। इसका उद्देश्य मेट्रो ट्रेन और चुनिंदा स्टेशन पर प्रदर्शित संदेशों के माध्यम से लाखों यात्रियों तक पहुंच बनाना है।
ये संदेश महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता एवं डिजिटल समावेशन की अहमियत को रेखांकित करने के साथ ही तपेदिक और प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण (पीसी-पीएनडीटी) के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने अभियान की शुरुआत के मौके पर कहा, “अगर महिलाएं स्वस्थ न हों, तो कोई भी परिवार या राष्ट्र सही मायने में प्रगति नहीं कर सकता। महिलाओं का स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।”
उन्होंने कहा, “दिल्ली मेट्रो के इस अभियान के जरिये हम इस संदेश को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह अभियान संदेश को सीधे महिलाओं तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।”
श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित संदेश मेट्रो ट्रेन के डिब्बों के अंदर और बाहरी हिस्से, दोनों पर प्रदर्शित किए गए हैं।
स्वास्थ्य सचिव ने लिंग जांच के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों की बढ़ती सुलभता पर कहा, “पहले लोग भ्रूण का लिंग निर्धारित करने के लिए अल्ट्रासाउंड पर निर्भर थे। अब इसी उद्देश्य के लिए नयी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तरीकों को बंद करना होगा और लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया प्रभारी कैथरीना बोहेम ने कहा, “इस मेट्रो स्टेशन पर कुछ यात्राएं समाप्त होती हैं और कुछ शुरू होती हैं। आज लैंगिक हिंसा के खिलाफ 16 दिनों के अभियान का अंतिम दिन है। और जैसे ही यह अभियान समाप्त होगा, एक नया अभियान शुरू होगा।”
उन्होंने कहा, “हमें महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू करते हुए गर्व हो रहा है। स्वस्थ महिलाएं एक स्वस्थ परिवार, समुदाय और राष्ट्र की स्तंभ हैं।”
भाषा जितेंद्र