सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने सीजेआई के खिलाफ ‘प्रेरित अभियान’ पर आपत्ति जताई
देवेंद्र प्रशांत
- 09 Dec 2025, 11:10 PM
- Updated: 11:10 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के कई सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने मंगलवार को एक बयान जारी कर ‘‘रोहिंग्या प्रवासियों से संबंधित सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की टिप्पणियों के मद्देनजर उन्हें निशाना बनाकर चलाए जा रहे प्रेरित अभियान पर कड़ी आपत्ति’’ जताई।
बयान में कहा गया है कि पांच दिसंबर को कुछ पूर्व न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक जवाबदेही एवं सुधार अभियान (सीजेएआर) द्वारा एक खुला पत्र जारी किया गया था, जिसमें भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों के हिरासत में लापता होने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही उच्चतम न्यायालय की पीठ द्वारा ‘‘दो दिसंबर को रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी’’।
बयान में इस बात को रेखांकित किया गया कि ‘‘उच्चतम न्यायालय की अवमानना अस्वीकार्य है’’। इसमें कहा गया है कि न्यायिक कार्यवाही केवल निष्पक्ष और तर्कसंगत आलोचना के अधीन होनी चाहिए।
इसमें कहा गया है, ‘‘हालांकि, हम जो देख रहे हैं, वह सैद्धांतिक असहमति नहीं है, बल्कि एक नियमित अदालती कार्यवाही को पूर्वाग्रह से प्रेरित कृत्य बताकर न्यायपालिका को अवैध ठहराने का प्रयास है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘प्रधान न्यायाधीश को सबसे बुनियादी कानूनी सवाल पूछने के लिए निशाना जा रहा है: अधिकारों या हकों पर कोई भी निर्णय तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक इस प्रारंभिक प्रश्न का समाधान न किया जाए।’’
इसमें कहा गया है कि प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ अभियान में सुनवाई के दौरान पीठ की स्पष्ट पुष्टि को नजरअंदाज कर दिया गया कि भारतीय धरती पर किसी भी व्यक्ति, चाहे वह नागरिक हो या विदेशी, को यातना या अमानवीय व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ेगा तथा प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
बयान पर 40 से अधिक न्यायाधीशों के हस्ताक्षर हैं। इसमें कहा गया है, ‘‘इसलिए हम उच्चतम न्यायालय और प्रधान न्यायाधीश में अपना पूरा विश्वास व्यक्त करते हैं, न्यायालय की टिप्पणियों को विकृत करने और असहमति को व्यक्तिगत न्यायाधीशों पर हमले के रूप में प्रस्तुत करने के लक्षित प्रयासों की निंदा करते हैं।’’
इसमें कहा गया है कि देश की संवैधानिक व्यवस्था के लिए मानवता और सतर्कता दोनों की आवश्यकता है।
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