दिल्ली-एनसीआर के 91 फीसदी युवा मानते हैं, फर्जी खबरें मतदान को प्रभावित करती हैं : सर्वेक्षण
जितेंद्र माधव
- 10 May 2024, 10:03 PM
- Updated: 10:03 PM
नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के 91 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि चुनाव से पहले फर्जी खबरें मतदान को प्रभावित कर सकती हैं जबकि 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि फर्जी खबरों ने किसी घटना या फिर जनता से जुड़े व्यक्ति के बारे में उनकी धारणा या राय को बदल दिया।
द 23 वॉट्स ने दिल्ली-एनसीआर में 17 से 25 वर्ष के आयु वर्ग के 1,200 युवाओं पर एक सर्वे किया, जिसका नाम 'ट्रुथ बी टोल्ड' है। इस सर्वे में इस बात का पता लगाने की कोशिश की गयी कि युवा गलत सूचना की जटिलताओं को कैसे समझते हैं, उन्हें कैसे लेते हैं और उससे कैसे निपटते हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, 55 प्रतिशत युवाओं ने दावा किया कि उन्होंने कभी फर्जी खबरें साझा नहीं कीं और शेष उत्तरदाताओं ने खबर पक्की होने के विश्वास, खबर के सत्यापन के लिए समय की कमी, खबर को जल्दी से जल्दी साझा करने की इच्छा के कारण इन्हें फैलाया।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि 62 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि फर्जी खबरें न केवल धारणाओं को बदलने का काम करती हैं बल्कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाती है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, ज्यादातर फर्जी खबरें सार्वजनिक हस्तियों और राजनेताओं के बारे में होती हैं और उसके बाद तीसरे नंबर पर धर्म से जुड़़ी होती हैं।
गलत सूचना के विषय पर 57 प्रतिशत युवाओं ने माना कि उन्होंने राजनेताओं और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़ी फर्जी खबरों से धोखा खाया। जबकि 15 प्रतिशत युवाओं ने धर्म के बारे में फर्जी खबरें और झूठी जानकारियां प्राप्त कीं।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि स्थिति पूरी तरह से निराशाजनक नहीं है क्योंकि 95 प्रतिशत युवाओं ने दावा किया है कि वे फर्जी खबरों के तथ्यों की जांच के लिए अलग-अलग वेबसाइट, उसके स्रोत, उसके बारे में दूसरे लोगों से बात करके समाचार को प्रमाणित करने का प्रयास करते हैं।
हालांकि समाचारों को प्रमाणित करने के दावे के बावजूद 45 प्रतिशत युवाओं ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने जो अप्रामाणिक समाचार साझा किए वे बाद में फर्जी निकले।
सर्वेक्षण के मुताबिक, 89 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि सरकार अगर चाहे तो फर्जी खबरों को नियंत्रित करने के लिए और भी कुछ कदम उठा सकती है।
सर्वेक्षण में सामने आया कि लगभग 69 प्रतिशत युवाओं ने फर्जी खबरों से निपटने के लिए सख्त नीतियों और दंड की वकालत की। जबकि 16 प्रतिशत का मानना है कि जागरूकता अभियान से इसे रोकने में मदद मिलेगी।
भाषा जितेंद्र