फिल्मी कलाकारों के तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर पूर्ण रोक लगाने की राज्यसभा में उठी मांग
अविनाश नरेश
- 04 Dec 2025, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने पान मसाला और गुटखा के भ्रामक विज्ञापनों पर चिंता जतायी और कहा कि फिल्मी कलाकारों द्वारा ऐसे उत्पादों के विज्ञापन पर पूर्ण रोक लगायी जानी चाहिए।
इसके साथ ही कई सदस्यों ने तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल से कैंसर सहित विभिन्न घातक बीमारियां होने का जिक्र किया और कहा कि इन बीमारियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है।
उच्च सदन में केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए बसपा सदस्य रामजी ने कहा कि गुटखा को लेकर तमाम तरह के भ्रामक प्रचार आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी गुटखे की होती है लेकिन वह पान मसाला का प्रचार करती है जिससे भ्रम पैदा होता है।
बसपा सदस्य ने मांग की कि ऐसे प्रचार पर रोक लगाई जानी चाहिए और गुटखा तथा खतरनाक उत्पादों के उपयोग से होने वाली परेशानियों को लेकर जागरूकता बढ़ायी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘जितने भी हीरो-हीरोइन ऐसा प्रचार करते हैं, उस पर रोक लगाई जानी चाहिए। कोई भी हीरो-हीरोइन सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला, गुटखा का प्रचार नहीं करे।’’
रामजी ने सिगरेट सहित विभिन्न तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस जारी करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार जिस प्रकार शराब और भांग बेचने के लिए लाइसेंस जारी करती है, उसी प्रकार सिगरेट, गुटखा आदि को बेचने के लिए भी लाइसेंस जारी करे।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस जरूरी होने की स्थिति में समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण हो जाएगा। उन्होंने स्कूलों और अस्पतालों के आसपास ऐसी दुकानों पर रोक लगाने की भी मांग की।
भाजपा सदस्य संजय सेठ ने कहा कि तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल से कैंसर, दिल और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लाखों लोग ऐसी बीमारियों की वजह से अपनी जान गंवाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद बनाने वाली कंपनियां सोडा या पानी की बोतलों के नाम पर विज्ञापन करती हैं क्योंकि नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों (तंबाकू, शराब आदि) के विज्ञापन पर सरकार ने रोक लगा दी है। उन्होंने मांग की कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगायी जानी चाहिए।
भाषा अविनाश