केरल राजभवन के सामने सीएए के खिलाफ कांग्रेस का धरना
योगेश अविनाश
- 13 Mar 2024, 07:14 PM
- Updated: 07:14 PM
तिरुवनंतपुरम, 13 मार्च (भाषा) केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विवादित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ बुधवार को यहां राजभवन के सामने धरना दिया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने धरने को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के लिए सीएए अधिसूचना जारी की है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तब हम गरीबों के जीवन में सुधार के लिए कई कानून लाए। लेकिन जब भाजपा सत्ता में आई, तब वह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए लोगों को बांटने के मकसद से कानून लाई।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कानून के खिलाफ लड़ेगी और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
संशोधित नागरिकता अधिनियम, 2019 पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों- हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है।
धरने में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) संयोजक और पार्टी के वरिष्ठ नेता एम. एम. हसन, तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर और अटिंगल के सांसद अदूर प्रकाश समेत कई नेता शामिल हुए।
अपने भाषण में थरूर ने कहा कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो हम सीएए को अरब सागर में फेंक देंगे। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी की घोषणापत्र समिति के सदस्य के रूप में यह मेरा बयान है।"
इस बीच केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) पदाधिकारियों, जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों और राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्यों की यहां हुई बैठक में सीएए के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का फैसला किया गया।
हसन ने आज केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। उन्होंने कहा कि सीएए वापस लेने तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले धार्मिक ध्रुवीकरण के एकमात्र उद्देश्य से नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा सीएए अधिसूचना जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि "यह असंवैधानिक कानून अदालत में टिक नहीं पाएगा।"
सतीशन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कुछ साल पहले सीएए के खिलाफ यूडीएफ के विरोध प्रदर्शन के संबंध में वामपंथी शासन द्वारा दर्ज किए गए 800 से अधिक मामलों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि कानून के खिलाफ एक दिन पहले प्रदर्शन करने वालों पर भी मामले दर्ज किये गए हैं। उन्होंने मांग की कि अगर मुख्यमंत्री गंभीर हैं तो उन्हें मामले वापस लेने चाहिए।
भाषा
योगेश