पसमांदा मुस्लिम संगठन ने वक्फ पर शीर्ष अदालत के फैसले को संतुलित बताया
नोमान नरेश
- 15 Sep 2025, 07:19 PM
- Updated: 07:19 PM
नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) पसमांदा मुसलमानों के एक संगठन ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कई प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह एक "संतुलित निर्णय" है जो संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करता है, इंसाफ सुनिश्चित करता है और वक्फ संस्थाओं की शुचिता बनाए रखता है।
भारत में मुस्लिम आबादी के भीतर पसमांदा मुसलमानों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा समुदाय माना जाता है।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष शारिक अदीब अंसारी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं और उनका मानना है कि यह फैसला एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो संवैधानिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, साथ ही न्याय और निष्पक्ष शासन की भावना को भी कायम रखता है।
अंसारी ने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय, खासकर पसमांदा मुसलमानों के लिए बहुत आवश्यक स्पष्टता प्रदान करता है, जिन्हें अक्सर संस्थागत प्रक्रियाओं में हाशिए पर रखा जाता है।
उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय ने एक संतुलित निर्णय दिया है जो संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करता है, इंसाफ सुनिश्चित करता है और कानून के शासन को कायम रखते हुए वक्फ संस्थाओं की शुचिता बनाए रखता है। मेरा मानना है कि यह निर्णय भारत के मुसलमानों - खासकर पसमांदा तबकों - को संवैधानिक ढांचे के भीतर उनके अधिकारों की रक्षा करके लाभान्वित करेगा।"
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगा दी जिनमें यह प्रावधान भी शामिल है कि केवल वे लोग ही किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दे सकते हैं जो पिछले पांच साल से इस्लाम का पालन कर रहे हैं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने पूरे कानून पर स्थगन से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने वक्फ संपत्तियों की स्थिति पर निर्णय करने के लिए जिलाधिकारी को दी गई शक्तियों पर भी रोक लगा दी और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम भागीदारी के विवादास्पद मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया कि केंद्रीय वक्फ परिषद में 20 में से चार से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए, और राज्य वक्फ बोर्डों में 11 में से तीन से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए।
भाषा
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