धराली में बचाव कार्यों में इस्तेमाल उन्नत उपकरणों का अनुभव साझा करें एजेंसियां: एनडीएमए
दीप्ति जितेंद्र
- 27 Aug 2025, 09:08 PM
- Updated: 09:08 PM
देहरादून, 27 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने उत्तराखंड के आपदाग्रस्त धराली में बचाव एवं राहत कार्यों में जुटी सभी एजेंसियों से ग्राउंड पैनीट्रेटिंग कैमरा (जीपीआर) तथा अन्य उन्नत उपकरणों के इस्तेमाल पर अपना-अपना अनुभव साझा करने को कहा ताकि भविष्य में उपकरणों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
प्राधिकरण के संयुक्त सलाहकार (ऑपरेशंस) लेफ्टि कर्नल संजय कुमार शाही ने उत्तरकाशी के धराली में आयी आपदा में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए यह बात कही।
उन्होंने धराली में इस्तेमाल किए गए विभिन्न उपकरणों जैसे जीपीआर, उच्च स्तरीय मेटल डिटेक्टर, थर्मल इमेजर, ड्रोन, लिडार, विक्टिम लोकेटिंग कैमरा, लाइव डिटेक्टर के प्रयोग के दौरान प्राप्त अनुभवों के आधार पर एजेंसियों से एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
लेफ्टि. कर्नल शाही ने कहा कि जिन भी एजेंसियों ने धराली में इनका प्रयोग किया, वे अगर प्रयोग के दौरान अपने अनुभवों को साझा करेंगी तो अन्य स्थानों में घटित होने वाली आपदाओं के दौरान इनका और बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है ।
उन्होंने मौके पर इन उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे राहत एवं बचाव दलों से ये सुझाव भी देने को कहा कि किस प्रकार तकनीकी के प्रयोग को और बेहतर किया जा सकता है।
लेफ्टि. कर्नल शाही ने मानसून के इस मौसम में चमोली जिले के थराली, उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी, पौड़ी जिले में तथा प्रदेश के अन्य स्थानों पर आपदा से हुए नुकसान की जानकारी भी ली।
उन्होंने प्राधिकरण के स्तर से राज्य को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए आपदाओं के बाद उत्तराखंड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की।
लेफ्टि. कर्नल शाही ने कहा कि इन आपदाओं का सामना करने में आपदा प्रबंधन विभाग तथा विभिन्न संबंधित विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।
प्रदेश के आपदा प्रबंधन और पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड का पूरा आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी क्षमता तथा दक्षता के साथ धराली और थराली में डटा है।
उन्होंने बताया कि दोनों ही आपदाएं बड़ी हैं, लेकिन मौके पर कार्य कर रही टीमों के हौसले भी बुलंद हैं।
सुमन ने धराली आपदा के दौरान प्राधिकरण के सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस मानसून अवधि में राज्य को हुए नुकसान की एक समग्र रिपोर्ट जल्द ही केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
भाषा दीप्ति