दिल्ली स्वास्थ्य अवसंरचना ‘घोटाला’ : ईडी की छापेमारी दूसरे दिन भी जारी
सुभाष माधव
- 27 Aug 2025, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली में पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के दौरान स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मंगलवार सुबह लगभग 13 स्थानों पर छापेमारी शुरू की गई। आप नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के चिराग दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी आधी रात के बाद समाप्त हुई, जो लगभग 17 से 18 घंटे तक चली।
सूत्रों ने बताया कि कुछ संस्थाओं में तलाशी जारी है। इसके आज रात या बृहस्पतिवार तड़के तक पूरी होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों के परिसरों में तलाशी ली गई, उनमें राष्ट्रीय राजधानी के कस्तूरबा गांधी मार्ग और पश्चिम पटेल नगर इलाकों में स्थित कुछ निजी ठेकेदार और वाणिज्यिक रियल एस्टेट डेवलपर शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि अब तक कुछ दस्तावेज, मोबाइल फोन और कंप्यूटर जब्त किए गए हैं।
आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख और राष्ट्रीय प्रवक्ता भारद्वाज (45) और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की गई जांच, दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा 26 जून को दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है।
एसीबी ने भारद्वाज, उनकी पार्टी के सहयोगी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, निजी ठेकेदारों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती आप सरकार द्वारा तैयार की गई स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के लिए मामला दर्ज किया है।
भारद्वाज ने यहां संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि ईडी अधिकारियों ने उनके बयान से छेड़छाड़ करने की ‘‘कोशिश’’ की और आरोप लगाया कि उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने उन्हें फंसाने के लिए ‘‘साजिश रची।’’
आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को कहा था कि यह मामला उस समय का है जब भारद्वाज मंत्री नहीं थे।
एसीबी की यह शिकायत, पिछले साल अगस्त में भाजपा की दिल्ली इकाई द्वारा तत्कालीन आप सरकार के तहत विभिन्न स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में ‘‘गंभीर’’ अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद आई।
शिकायत में ‘‘परियोजना बजट में सुनियोजित तरीके से हेरफेर करने, सरकारी धन के दुरुपयोग और निजी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत’’ का आरोप लगाया गया था।
आरोप है कि 2018-19 के दौरान, 5,590 करोड़ रुपये की 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, ये परियोजनाएं ‘‘अत्यधिक’’ और ‘‘अस्पष्ट’’ लागत वृद्धि के साथ, काफी हद तक अधूरी रहीं।
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